Tuesday, August 15, 2017

PM ने किया TRIPLE TALAQ के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली महिलाओं का अभिनंदन

70वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Triple  Talaq के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली महिलाओं का अभिनंदन किया. प्रधामंत्री ने कहा, भविष्य के निर्माण में माताओं-बहनों का योगदान अहम होता है. मैं उन बहनों का अभिनंदन करना चाहता हूं कि जो तीन तलाक से...
पीड़ित थीं और उन्होंने इसके लिए उन्होंने आंदोलन खड़ा किया. इस आंदोलन ने बुद्धिजीवियों हिला दिया. प्रधानमंत्री ने कहा मैं आंदोलन को चलाने वाली बहनों का हृदय से अभिनंदन करता हूं. मुझे विश्वास है कि बहनों की इस लड़ाई में हिंदुस्तान इनकी पूरी मदद करेगा.
प्रधानमंत्री पहले ही मुस्लिम समुदायों से आग्रह कर चुके हैं कि वे इस मुद्दे को राजनीति के चश्मे से नहीं देखें बल्कि यह समझें कि इससे मुस्लिम महिलाओं को जिंदगी में कितनी तरह की दिक्कतें उठानी पड़ती है. नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने के लिए इस समुदाय से इस समस्या का हल खुद निकालने की अपील भी की थी.

मार्च 2016 में उतराखंड की शायरा बानो नामक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी. बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन कानून 1937 की धारा 2 की संवैधानिकता को चुनौती दी.  इस याचिका के बाद ही देश भर में तीन तलाक पर बहस शुरु हो गई. आफरीन रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और आतिया सबरी, ये सभी वे महिलाएं है जो तीन तलाक  की जलालत झेल रही है. इन महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट से बहुत उम्मीदें हैं.


तीन तलाक़ से पीड़ित महिलाओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर इसी साल मई महीने में सुनवाई की थी. कोर्ट ने अभी फैसला सुरक्षित रखा है. हालांकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह फैसले का इंतजार करने के बजाए मुस्लिमों में तीन तलाक और शादी से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए एक कानून बनाए

70वें स्वतंत्रता दिवस केमौके पर लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Triple  Talaq के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली महिलाओं का अभिनंदन किया. प्रधामंत्री ने कहा, भविष्य के निर्माण में माताओं-बहनों का योगदान अहम होता है. मैं उन बहनों का अभिनंदन करना चाहता हूं कि जो तीन तलाक से पीड़ित थीं और उन्होंने इसके लिए उन्होंने आंदोलन खड़ा किया. इस आंदोलन ने बुद्धिजीवियों हिला दिया. प्रधानमंत्री ने कहा मैं आंदोलन को चलाने वाली बहनों का हृदय से अभिनंदन करता हूं. मुझे विश्वास है कि बहनों की इस लड़ाई में हिंदुस्तान इनकी पूरी मदद करेगा.



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प्रधानमंत्री पहले ही मुस्लिम समुदायों से आग्रह कर चुके हैं कि वे इस मुद्दे को राजनीति के चश्मे से नहीं देखें बल्कि यह समझें कि इससे मुस्लिम महिलाओं को जिंदगी में कितनी तरह की दिक्कतें उठानी पड़ती है. नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने के लिए इस समुदाय से इस समस्या का हल खुद निकालने की अपील भी की थी.


मार्च 2016 में उतराखंड की शायरा बानो नामक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी. बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन कानून 1937 की धारा 2 की संवैधानिकता को चुनौती दी.  इस याचिका के बाद ही देश भर में तीन तलाक पर बहस शुरु हो गई. आफरीन रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और आतिया सबरी, ये सभी वे महिलाएं है जो तीन तलाक  की जलालत झेल रही है. इन महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट से बहुत उम्मीदें हैं.


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तीन तलाक़ से पीड़ित महिलाओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर इसी साल मई महीने में सुनवाई की थी. कोर्ट ने अभी फैसला सुरक्षित रखा है. हालांकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह फैसले का इंतजार करने के बजाए मुस्लिमों में तीन तलाक और शादी से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए एक कानून बनाए.
70वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Triple  Talaq के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली महिलाओं का अभिनंदन किया. प्रधामंत्री ने कहा, भविष्य के निर्माण में माताओं-बहनों का योगदान अहम होता है. मैं उन बहनों का अभिनंदन करना चाहता हूं कि जो तीन तलाक से पीड़ित थीं और उन्होंने इसके लिए उन्होंने आंदोलन खड़ा किया. इस आंदोलन ने बुद्धिजीवियों हिला दिया. प्रधानमंत्री ने कहा मैं आंदोलन को चलाने वाली बहनों का हृदय से अभिनंदन करता हूं. मुझे विश्वास है कि बहनों की इस लड़ाई में हिंदुस्तान इनकी पूरी मदद करेगा.


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प्रधानमंत्री पहले ही मुस्लिम समुदायों से आग्रह कर चुके हैं कि वे इस मुद्दे को राजनीति के चश्मे से नहीं देखें बल्कि यह समझें कि इससे मुस्लिम महिलाओं को जिंदगी में कितनी तरह की दिक्कतें उठानी पड़ती है. नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने के लिए इस समुदाय से इस समस्या का हल खुद निकालने की अपील भी की थी.


मार्च 2016 में उतराखंड की शायरा बानो नामक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी. बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन कानून 1937 की धारा 2 की संवैधानिकता को चुनौती दी.  इस याचिका के बाद ही देश भर में तीन तलाक पर बहस शुरु हो गई. आफरीन रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और आतिया सबरी, ये सभी वे महिलाएं है जो तीन तलाक  की जलालत झेल रही है. इन महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट से बहुत उम्मीदें हैं.



 
तीन तलाक़ से पीड़ित महिलाओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर इसी साल मई महीने में सुनवाई की थी. कोर्ट ने अभी फैसला सुरक्षित रखा है. हालांकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह फैसले का इंतजार करने के बजाए मुस्लिमों में तीन तलाक और शादी से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए एक कानून बनाए.

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