Friday, July 21, 2017

महिलाओं की #NaturalSelfie को लेकर बाज़ार परेशान, लेकिन मर्द हैं क्यों साथ ?

प्रतिभा ज्योति:
इन दिनों सोशल मीडिया पर #NaturalSelfie की खूब चर्चा हो रही है. इस कैंपेन के तहत महिलाएं अपनी नैचुरल सेल्फी यानी बिना मेकअप वाला अपना फोटो फेसबुक पर पोस्ट कर रही हैं. मकसद है यह बताना कि आखिर कितना भी मेकअप कर लो, व्यक्ति की आंतरिक सुंदरता का मुक़ाबला कोई नहीं कर सकता. यह मुहिम उन लोगों को एक संदेश
भी है कि जो बाज़ार के सौंदर्य़ प्रतियोगिता की अंधी लड़ाई में खुद को भी शामिल करना चाहते हैं. इस मुहिम को शुरु किया है प्रैस इन्फोर्मेशन ब्यूरो की सूचना अधिकारी गीता यथार्थ ने.
गीता ने यह लिखकर मुहिम की शुरुआत की..
#Naturalselfie
बिना मेकअप
बिना काजल-कुंडल
बिना लिप्स्टिक
चिपके तेल लगे बालों में
हम ऐसे दिखते हैं
बाजारबाद अब तेरा क्या होगा?
‘ब्यूटी विद ब्रेन’ महिलाओं को छलने के लिए बनाया गया कॉन्सेप्ट था, ब्रेन है ब्रेनी है,  अलग से ब्यूटी का भार क्यों डाल दिया पेट्रिआर्कि ने लड़कियों के ऊपर.
गीता यथार्थ के इस मुहिम को सोशल मीडिया पर महिलाओं का काफी समर्थन मिल रहा है. गीता बताती हैं कि एक दिन उनकी एक सहेली जो कि काफी मेकअप करती है उसने अपनी नैचुरल सेल्फी भेजी और बस तभी मुझे इस मुहिम को शुरु करने का ख्याल आया. नैचुरल सेल्फी की यह मुहिम गीता ने 19 जुलाई को शुरु की लेकिन उनके समर्थन में अब कई कई लड़कियों और महिलाओं ने अपनी सेल्फी फेसबुक पर पोस्ट कर दिया है.  
वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका गीताश्री ने भी इस मुहिम के समर्थन में अपनी नैचुरल सेल्फी पोस्ट करते हुए लिखा हम मेकअप कम करते हैं. थोड़ी बहुत पुताई इधर शुरु हुई थी. ज़माने के देखादेखी. ज़िंदगी गुज़ार दी सिर्फ काजल पर. काजल भी तब आई आंखों में जब संघर्ष का उजाला ज़्यादा भर गया था. 1995 से पहले काजल भी नहीं. मेकअप का एक सामान नहीं पर्स में.
गीता यथार्थ बताती हैं कि हैरानी हुई कि मेरे इस मुहिम को कई पुरुषों का समर्थन मिला. फिरोज खान, अमित विराट, हैदर अब्बास, सत्येंद्र यादव, वेद दुबे और सूर्य प्रकाश ने भी अपनी नैचुरल सेल्फी सेल्फी पोस्ट की. फिरोज खान ने तो यहां तक लिखा कि मैं एक पुरुष हूं लेकिन स्त्री होना चाहता हूं. वे कहती है अच्छा लगता है कि जब कोई पुरुष किसी स्त्री मुद्दे पर समर्थन करते हैं.
हालांकि कुछ लोगों ने इस मुहिम का विरोध भी किया है. कथाकार प्रत्यक्षा ने लिखा कि नैचुरल सेल्फी टाइमपास अच्छा है. मजे की बात कि कैसे सब भीड़ का पार्ट हुए जाते हैं. कुछ मजे में, कुछ राइटियसनस में, कुछ एक्टिविजम में. अच्छा दिखना अच्छा लगता है. हर इंसान को, मन करे तो मेकअप करिए न करें तो बिंदास रहिए, हू केयर्स. वहीं कवि अशोक कुमार पांडेय ने लिखा-बाजार से खरीदे फोन, बाजार के डेटा पैक और बाजार के नियमों से चलने वाले फेसबुक बाजार आविष्कृत सेल्फी तकनीक से बाजार के विरोध. इसे क्या कहेंगे? आत्मसंभ्रम? क्रांति की मध्यमवर्गीय सुविधाग्रस्त अदा..


साभार-womeniaworld.com
http://womeniaworld.com/womens-natural-selfie-challenge-for-whom/

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