Wednesday, July 12, 2017

सेंसर बोर्ड ने "इंदू सरकार" में 14 कट लगाने के लिए क्यों कहा मधुर भंडारकर को ?

चांदनी बार, सत्ता और पेज 3 जैसा बेहतरीन फिल्में बनाने वाले Madhur Bhandarkar अब एक नई फिल्म ‘Indu Sarkar’ लेकर आ रहे हैं, जिस पर विवाद भी शुरु हो गया है. Central Board of Film Certification ने उन्हें फिल्म में RSS, Akali Dal और गायक किशोर कुमार के References को मिलाकर कुल 14 Cut लगाने को कहा है. फिल्म के बारे में मधुर भंडारकर बताते
हैं कि ये फिल्म आपातकाल के समय पर बनी एक कहानी है जिसमें इंदु एक कवियत्री है, लेकिन वो हकलाहट के मारे परेशान है. उसकी शादी एक ऐसे ब्यूरोक्रेट से होती है. मधुर की फिल्म इंदु सरकार 28 जुलाई को रिलीज़ हो रही है. फिल्म को लेकर मधुर ने और बातचीत की Womenia संवाददाता रुना आशीष से…
आपकी इस फिल्म को लेकर कांग्रेस विरोध में क्यों आ गई है?
मैं इतना ही कह सकता हूं कि हर फिल्मकार को स्वतंत्रता है कि किसी भी बात को अपने तरीके से बताने की. मेरे पास भी विरोध की बातें पहुंच रही हैं लेकिन मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि पहले फिल्म तो देख लो उसके बाद हम बातें कर सकते हैं. मै जब इस फिल्म के लिए रिसर्च कर रहा था तो मैंने खुद दूरदर्शन की कई डॉक्यूमेंटेरीज़ देखी हैं और उस आधार पर अपनी कहानी को लिखा और बनाया है.
इंदु सरकार बनाने में किस तरह की रिसर्च की ज़रूरत पड़ी?
इस फिल्म के लिए मैंने बहुत Research किया है. मेरे साथ में नितिन देसाई तो थे ही. हमने कई शहरों के  चोर बाज़ारों में जा- जा कर सत्तर के दशक के रेडियो,  टीवी फ्रिज सभी चीज़े खरीदी. हमने उस समय के ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स भी इस फिल्म के लिए  इस्तेमाल किया है. इमरजेंसी के समय के अखबार और कई मैगज़ीन को हमने फिर से छपवाया है ताकि फिल्म में हम ऐसा कोई सीन शूट कर रहे हों तो वो विश्वसनीय लगे. इसके लिए हमने कर्जत के स्टूडियो में दिल्ली की कई जगहों को भी बनाया जैसे चांदनी चौक हो या कनॉटप्लेस हो. शूट के समय तो कलाकार से ले कर सेट के लोग भी सारी चीज़ों को इतना खुश हो कर देख रहे थे जबकि मैं कह भी रहा था कि अब ये सब चीज़ें किसी काम की नहीं रही हैं.
आपको लगता है कि ये फिल्म युवा वर्ग को पसंद आएगी?
पिछले पांच या छह साल में फिल्म देखने वालों में नई पीढ़ी जुड़ी है वो बहुत जागरुक और उत्सुक दोनों है. उन्हें बहुत ज़रूरी है ये बताना कि हमारे देश में ऐसा भी समय आया था जब इमरजेंसी लगी थी. मुझे लगता है कि मैंने उन्हें अपनी फिल्म के जरिए सही जानकारी देने की भरपूर कोशिश की भी है.
आपकी फिल्में देख कर कभी कोई प्रेरित हुआ है?

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एक बार मुझे एक बुज़ुर्ग मिले थे जिन्होंने कहा कि उनकी बेटी लंदन में रहती है और अच्छी तरह से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है. उसने एक दिन अचानक से कहा कि वो फिल्मों में हिरोइन बनना चाहती है. बुज़ुर्ग पिता अपनी इस बेटी के सपने तोड़ना नहीं चाहता था और उसे सच्चाई से अवगत भी कराना चाहता था. इसलिए उस बुज़ुर्ग शख्स ने अपनी बेटी को कहा कि एक बार वो मधुर भंडारकर की फिल्म पेज 3 और हिरोइन देख ले और उसके बाद अपने करियर के बारे में सोचे. बेटी ने भी फिल्म देखने के बाद फिल्म लाइन में आने की बात करना छोड़ दिया. कई बार मुझे लोग कहते भी हैं कि पेज 3 में जो मैंने जो दिखाया हमने उसे सच में लोगों के घरों में घटते देखा.
आप महिला प्रधान फिल्मों के Leader माने जाते हैं?
जब भी महिला प्रधान फिल्मों की बात आती है तो लोगों ने जाने-अंजाने में ही महिला प्रधान फिल्मों का लीडर बना दिया है. कहा जाता है कि अगर Women Centric फिल्में बनानी हो तो  मधुर के पास जाइये और अब देखिए तो वही निर्देशक महिला प्रधान फिल्में बना रहे हैं. मैने जेल नाम की फिल्म भी तो बनाई है जो पूरी तरह से पुरुषप्रधान फिल्म रही है.

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