Tuesday, June 27, 2017

PM Res से दो किलोमीटर दूर भी नज़रिया बदलने को तैयार नहीं



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महिलाओं को सम्मान देने और बेटियों को आगे बढ़ाने जैसी तमाम कोशिशें कारगर होती नज़र नहीं आ रही है क्योकिं समाज अपना नज़रिया बदलने को तैयार ही नहीं है. खासतौर से बात अगर औरतों की हो तो हमारी मर्द सोच और वो भी अमीर मर्द हों तो फिर किसी को कुछ नहीं समझने की आदत छोड़ने को तैयार नहीं हैं. किसी ना किसी बहाने से औरत को बेइज्ज़त करना कुछ लोगों का शगल सा लगता है .
दिल्ली के मशहूर गोल्फ क्लब में जो कुछ हुआ वो शर्मनाक है, लेकिन ना तो कोई उसकी ज़िम्मेदारी लेने को तैयार है और ना ही किसी को दोषी मान कर उसके ख़िलाफ कोई कार्रवाई करने को राजी. हां देश के गृह राज्य मंत्री किरन रीजीजू ने जरुर इस मामले को जातीय भेदभाव बताते हुए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक से जरुरी कार्रवाई करने को कहा है. रिजीजू से इस बात की शिकायत मेघालय के मुकुल संगमा ने की.
मेघालय की एक महिला को दिल्ली गॉल्फ क्लब के डाइनिंग रूम से निकल जाने को कहा गया. वो भी इसलिए क्योंकि महिला ने परंपरागत खासी परिधान ”जैनसेम ” पहन रखा था. क्लब के कर्मचारियों का मानना था कि वह ड्रैस मेड सर्वेन्ट यानी घर में काम करने वाली नौकरानी जैसी दिखती है.
तैयलिन लिंगदोह ने जैनसेम पहन रखा था जो परंपरागत तौर पर खासी समुदाय की महिलाएं पहनती हैं.  तैयलिन की कंपनी की ऑनर डॉ. निवेदिता बर्थाकुर सोंधी को 25 जून को दिल्ली गोल्फ क्लब में यहां के एक सदस्य ने आमंत्रित किया था. उनके साथ तैयलीन लिंगदोह भी वहां गई थी. तब वहां के दो कर्मचारी लिंगदोह के पास आए और उनसे कहा कि वह मेड जैसी दिख रही हैं इसलिए उन्हें वहां आने की इजाजत
नहीं है.” लिंगदोह ने अलग तरह की ड्रेस पहन रखी थी और इस वजह से वह उन्हें  मेड सरवेन्ट जैसी नजर आ रही थीं. लिंगदोह ने मीडिया को बताया कि जब वह भोजन ले रही थीं तभी उनसे वहां से जाने को कह दिया गया.
लिंगदोह के मुताबिक मैनेजर ने कहा, आपको यहां बैठने की  इजाजत नहीं है, आपको बाहर जाना होगा.” उन्होंने कहा, “मैं बाहर चली गई लेकिन ऐसी बात सुनना बेहद दुखद था.” लिंगदोह सोंधी के बेटे की आया हैं. उन्होंने कहा कि वे कई स्थानों पर गईं लेकिन कभी भी ऐसे कमेन्ट्स नहीं सुने, “मेरे परंपरागत परिधान की सभी ने सराहना की, ऐसी बात कभी किसी ने नहीं कही.”
हालांकि क्लब ने बाद में एक बयान जारी कर कहा कि मेजबान से माफी मांग ली गई है, साथ ही कहा कि मेहमानों को क्लब परिसर से बाहर निकलने को नहीं कहा गया. ऐसा ही एक किस्सा हुआ था एक ज़माने पहले मशहूर पेन्टर को एक क्लब ने नंगे पैर अंदर आने की इजाज़त नहीं दी गई थी. हमारे मुल्क की आज़ादी के 70 बरस पूरे हो गए हैं, लेकिन अब भी बहुत से लोगों के दिमाग़ से साहबी का फितूर नहीं उतरा है .इस पर कुछ ठोस करने की ज़रुरत है सरकार को कि हर आम आदमी को कम से कम आदमी जितना समझने की रवायत तो हो.

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