Friday, June 30, 2017

क्यों बढ़ रहा है महिलाओं के BRANDED कपड़ों का MARKET?

वर्किंग वूमेन की बढ़ती संख्या और उनके ख़र्च करने की क्षमता ने देश में ब्रांडेड कपड़ों के बाज़ार को अच्छी खासी रफ़्तार दे दी है. महिलाओं के रोज़ बदलते फ़ैशन ट्रेंड से बाज़ार के विकास दर में काफ़ी तेज़ी आई है. उम्मीद जताई जा रही है कि अगले सात से आठ सालों में पुरूषों के फ़ैशनेबल कपड़ों के बाज़ार की तुलना में महिला ब्रांडेड परिधान बाज़ार कहीं आगे निकल जाएगा. खासतौर पर लड़कियों के एथनिक वियर और वेस्टर्न वियर कपड़ों को पहनने की चाहत ने देसी बाज़ार में विदेशी ब्रांडों की धूम मचा दी है.
ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि एवेंडस कैपिटल की रिपोर्ट कह रही है. इसके हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में महिलाओं के ब्रांडेड कपड़ों का बाजार बढ़ रहा है.
इस बाजार के बढ़ने के कारण को कुछ इस तरह समझिए–
1-भारत में विदेशी ब्रांडेड कपड़ों की धूम है.
2- महिलाओं के ख़र्च करने की क्षमता में इज़ाफ़ा हुआ है.
3-  छूट और विशेष ऑफर देने का चलन बढ़ा है. 
4- सिलेसिलाए कपड़ों को पहनने का क्रेज़ बढ़ा है.
इन्हीं सब वजहों से महिलाओं के ब्रांडेड कपड़ों का बाज़ार 20 फ़ीसदी विकास दर से आगे बढ़ रहा है. रिपोर्ट में महिलाओं के कपड़े बाज़ार, उनके शापिंग बिहेवियर, ब्रांडेड कपड़ों का बढ़ता आकर्षण

कब से ऑनलाइन शॉपिंग पड़ेगी जेब पर भारी?


महिलाएं ऑनलाइन शॉपिंग की बहुत शौकीन होती हैं. ई-कॉमर्स कंपनियां आए दिन कोई न कोई सेल या महासेल का ऑफर देकर ग्राहकों को लुभाने की कोशिश करती हैं. छुट्टियों और फेस्टिवल सीजन में यह बढ़ जाता है. महिलाएं समय की बचत करने और बाजारों के चक्कर काटने से बचने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग पसंद करती हैं लेकिन जुलाई महीने से जीएसटी के लागू होने के कारण ऑनलाइन शॉपिंग अब उन्हें महंगी पड़ने वाली है.
कोरल रिसर्च सर्विस कंपनी की रिसर्च टीम में शामिल सौरव कहते है, ‘भारतीयों में ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड धीमी गति से प्रचलित हो रहा है. मगर महिलाएं इससे काफी जुड़ी हुई हैं. यह उनके लिए आसान भी है और कम पैसे और मेहनत में अच्छा सामान भी मिल जाता है. खासतौर पर फ़ेस्टिवसीजन आते ही ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर महिलाओं की रुचि बढ़ जाती है. लेकिन इस जुलाई से अब महिलाओं के लिए ऑनलाइन शॉपिंग का सौदा फायदेमंद नहीं होने वाला है.
दरअसल जीएसटी के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले विक्रेताओं दोनों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरुरी होगा. उन्हें किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी. पहले कर के दायरे में नहीं आने के कारण ऑनलाइन विक्रेता सस्ते में सामान बेच देते थे. अब ई-कॉमर्स कंपनियों का अनुमान है कि अब जो भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामान बेचना चाहेगा उसे एक फीसदी का कर देना पहले ही देना होगा. इस सब से सामानों के दाम बढ जाएंगे और लोगों के लिए ऑनलाइन शॉपिंग करना सस्ता नहीं रहेगा. जीएसटी के तहत

Wednesday, June 28, 2017

दिल्ली वाले क्यों चाहते हैं कि पूरा देश सिर्फ उनके हिसाब से चले

दिल्ली के गोल्फ क्लब में पारंपरिक जैनसेम पहनकर गई मेघालयी महिला तलिन लिंगदोह के साथ जो शर्मनाक वाकया हुआ वो महिलाओं और अपनी संस्कृति के प्रति लोगों की रुढ़िवादी सोच को दिखाता है. कुछ लोग लोग आधुनिक और प्रगतिशील कहलाने के लिए अपनी संस्कृति और परंपराओं से मुंह मोड़ लेते हैं. यही वजह है कि महानगरों में लोग उन लोगों को देखकर अजीब सा मुंह बनाते हैं या उनके साथ भेदभाव करते हैं जो अपने पारंपरिक परिधानों में रहते हैं. लेकिन इसे पहनने वाली लोग खुद को गौरवान्वित और अपनी संस्कृति से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं. जैसे दक्षिण भारत के लोग अपने परंपरागत लुंगी को पहनते हैं जैसा कि हम कई बड़े नेताओं को भी देख चुके हैं जैसे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम हों या मौजूदा सूचना और प्रसारण मंत्री वैंकेया नायडु.  इसी तरह महिलाएं भी अपने पारंपरिक ड्रेस को पहनकर गर्व, सहजता और आत्मविश्वास महसूस करती हैं.
पारंपरिक परिधान महिलाओं में न केवल आत्मविश्वास पैदा करताहै बल्कि यह हमारी विरासत से हमें जोड़ने का माध्यम भी है. देश के कई हिस्सों में साड़ी को महिलाओं की पंरपरागत ड्रेस के तौर पर देखा जाता है. इसी तरह नार्थ ईस्ट की महिलाएं आधुनिक ड्रेस के अलावा खूब शौक से अपने पारंपरिक ड्रेस को पहनती हैं. वे घर और बाहर के सारे काम भी इन्हीं कपड़ों में निबटाती हैं क्योंकि ये कपड़े उनकी संस्कृति और परंपरा में रचे-बसे हैं. इससे वे कंफर्टेबल और कांफिडेंट महसूस करती हैं. वे पूरे कांफिडेंस के साथ सार्वजनिक स्थानों और कार्यक्रमों में जाती हैं. फिर चाहे हम बात चैंपियन बॉक्सर और राज्यसभा सांसद मैरीकॉम की करें या अभिनेत्री पत्रलेखा की. सभी अपने पारंपरिक पहनावे को पसंद करती हैं. त्रिपुरा की दीपा करमाकर जिन्होंने रियो ओलंपिक में पहुंचकर भारतीय जिम्नास्टिक्स में एक नया इतिहास रचा उन्हें भी अपना पारंपरिक ड्रेस पहनना बहुत पसंद है.  मणिपुर की खिलाड़ी अनुराधा देवी, सुशीला चानू हो या तीरंदाजी में देश का नाम रोशन करने वाली मणिपुर की बोम्बायला देवी ये सब अपने पारंपरिक परिधानों में गर्व का अनुभव करती हैं.  

  North East  की महिलाओं के कुछ ख़ास पारंपरिक ड्रेस

1-मेघालय के पारंपरिक खासी जाति का परिधान  जैनसेम या धारा हैं. 
2-नागालैंड की महिलाओं में अंगामी और ‘ली’ काफी लोकप्रिय परिधान है.
3-वहीं मणिपुर और मेघालय के परिधान में ज्यादा अंतर नहीं है केवल रंगों का फर्क होता है. यहां की महिलाएं सिल्क के बने स्कार्फ यानी मुगा और नीचे फानेक पहनती हैं.
4-असम की महिलाएं परंपरागत मेखेला चादोर को

एक घूँघट सरकार भी निकाल ले, जनता के सामने आने से पहले..!!


प्रतिभा ज्योति
लगता है हरियाणा सरकार  का असल चेहरा सामने आने लगा है,दिखावे के लिए वो भले ही बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ की बात करती रहे या फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खुश करने के लिए कोई कार्यक्रम लड़कियों के लिए करती रहे ,लेकिन उसकी सोच में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है .
 हरियाणा की बीजेपी सरकार के लिए लड़कियों  की शान घूंघट में रहने से ही है और घूंघट ही हरियाणा का शान भी है.  राज्य सरकार की एक पत्रिका में छपी तस्वीर पर विवाद शुरु हो गया है. तस्वीर के साथ लगे कैप्शन में घूंघटको राज्य की पहचानबताया गया है, जिससे विवाद पैदा हो गया है. राजनीतिक  हलकों और सोशल मीडिया पर लगातार उस विज्ञापन को लेकर सरकार की तीखी आलोचना हो रही है ,लेकिन सरकार ने अभी उस विज्ञापन को वापस नहीं लिया है.  
विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह भाजपा सरकार की

शबनम हाशमी ने क्यों लौटाया अपना AWARD


सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी में हरियाणा के बल्लभगढ़ में ट्रेन में एक मुस्लिम लड़के की पीट कर हत्या किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अवार्ड लौटा दिया है. उन्होंने यह अवार्ड 27 जून को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को लौटा दिया. उन्हें कांग्रेस की सरकार के समय 2008 में यह अवार्ड दिया गया था.  
वुमनिया से बातचीत में शबनम हाशमी ने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों के विरोध में जिस तरह का माहौल बन रहा है और जिस तरह उन पर हमले हो रहे हैं, मुझे लगा कि विरोध करना जरुरी है. मुझे यह अवार्ड अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए दिया गया था लेकिन जब माहौल ही ऐसा नहीं है तो इस अवार्ड को रखने का कोई फायदा भी नहीं है. इसलिए मैंने इसे वापस कर दिया है.
उन्होंने कहा कि यह सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में पूरी तरह फेल

Tuesday, June 27, 2017

Bank Account में अचानक पैसा आए तो Alert हो जाएं

अगर आपके बैंक एकाउंट में अचानक मोटी रक़म आ जाए जिसके बारे में आपको कोई जानकारी नहीं है तो इसमें खुश होने वाली बात नहीं है. बल्कि इसकी जगह आपको चिंता करने की जरुरत है यह रकम आपके पास आई कैसे? हो सकता है कि किसी ने अपनी काली कमाई आपके एकाउंट में जमा करके बचने की कोशिश कर रहा हो. ऐसे में आपको तत्काल बैंक में शिकायत दर्ज करानी चाहिए क्योंकि इस तरह के मामलों में आयकर विभागग आपसे पूछताछ या कार्रवाई कर सकता है.  
दरअसल नवबंर 2016 में नोटबंदी के बाद से देश में इस तरह की घटनाएं बढ़ी है. कॉरपोरेशन बैंक में अधिकारी प्रियंका सहाय बताती हैं कि हाल के दिनों में इस तरह के आर्थिक अपराध बढ़े हैं. ऐसे मामले बैंकों के सामने आए हैं जिनमें काली कमाने वाले मोटी रकम जानबूझ किसी अंजान खाते में डाल दे रहे हैं, फिर कुछ दिनों में बैंक से अनुरोध कर उस रकम को निकालकर अपने खाते में डाल लेते हैं. इस तरह अंजान बैंक खाते से रुपयों के लेन-देन होने से काली कमाई के मामले उजागर होने से बच जाते हैं और काफी हद तक ब्लैकमनी व्हाइट मनी में बदल दिया जाता है. (ब्लैकमनी यानी जिसरकम पर टैक्स नहीं दिया गया हो या जिसके बारे में किसी भी तरह का ब्यौरा सरकार के रिकार्ड में नहीं हो) 
बैंक अधिकारी बताते हैं कि यह आयकर विभाग की आंखों में चालाकी से धूल झोंकने की कोशिश होती है. आमतौर पर ग्राहकों को इस बात की खुशी ज्यादा होती है कि उनके एकाउंट में अधिक रकम आने से उन्हें ब्याज ज्यादा मिलेगा लेकिन उन्हें यह पता ही नहीं कि भविष्य में उन पर मुसीबत भी टूट सकती है. दरअसल आयकर

PM Res से दो किलोमीटर दूर भी नज़रिया बदलने को तैयार नहीं



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महिलाओं को सम्मान देने और बेटियों को आगे बढ़ाने जैसी तमाम कोशिशें कारगर होती नज़र नहीं आ रही है क्योकिं समाज अपना नज़रिया बदलने को तैयार ही नहीं है. खासतौर से बात अगर औरतों की हो तो हमारी मर्द सोच और वो भी अमीर मर्द हों तो फिर किसी को कुछ नहीं समझने की आदत छोड़ने को तैयार नहीं हैं. किसी ना किसी बहाने से औरत को बेइज्ज़त करना कुछ लोगों का शगल सा लगता है .
दिल्ली के मशहूर गोल्फ क्लब में जो कुछ हुआ वो शर्मनाक है, लेकिन ना तो कोई उसकी ज़िम्मेदारी लेने को तैयार है और ना ही किसी को दोषी मान कर उसके ख़िलाफ कोई कार्रवाई करने को राजी. हां देश के गृह राज्य मंत्री किरन रीजीजू ने जरुर इस मामले को जातीय भेदभाव बताते हुए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक से जरुरी कार्रवाई करने को कहा है. रिजीजू से इस बात की शिकायत मेघालय के मुकुल संगमा ने की.
मेघालय की एक महिला को दिल्ली गॉल्फ क्लब के डाइनिंग रूम से निकल जाने को कहा गया. वो भी इसलिए क्योंकि महिला ने परंपरागत खासी परिधान ”जैनसेम ” पहन रखा था. क्लब के कर्मचारियों का मानना था कि वह ड्रैस मेड सर्वेन्ट यानी घर में काम करने वाली नौकरानी जैसी दिखती है.
तैयलिन लिंगदोह ने जैनसेम पहन रखा था जो परंपरागत तौर पर खासी समुदाय की महिलाएं पहनती हैं.  तैयलिन की कंपनी की ऑनर डॉ. निवेदिता बर्थाकुर सोंधी को 25 जून को दिल्ली गोल्फ क्लब में यहां के एक सदस्य ने आमंत्रित किया था. उनके साथ तैयलीन लिंगदोह भी वहां गई थी. तब वहां के दो कर्मचारी लिंगदोह के पास आए और उनसे कहा कि वह मेड जैसी दिख रही हैं इसलिए उन्हें वहां आने की इजाजत

जालसाजों के "TRAP" में तो नहीं आ गई आप?


रिया को किसी ने व्हाट्सएप के ज़रिए bank account details पाने वाले ख़ास नंबर के बारे में बताया. कहा गया कि अपने किसी भी बैंक खाते के बारे में वह इस नंबर से जानकारी हासिल कर सकती है. इतना सुनते ही उसने अपने खाते ता ब्यौरा व्हाट्सएप कर दिया लेकिन ऐसा करते ही वह जालसाज़ों के एक बड़े गैंग में फंस चुकी थी. किसी ने उसके खातों से रूपयों की अच्छी खासी चपत भी लगा दी.
अगर कोई आपको भी व्हाट्सअप पर bank account details जानने को उकसाता है और यह कहता है कि एक ख़ास नंबर पर बैंक खाते संबंधी ब्यौरा भेजकर सभी जानकारी हासिल की जा सकती है तो सावधान हो जाइए. निश्चित तौर पर कोई आपको अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहा है.
हाल के दिनों में इस तरह की घटनाओं पर आरबीआई ने बैंक ग्राहकों को सचेत किया है और बताया है कि आरबीआई के नकली logo के साथ एक एप all bank balance enquiry number के नाम से व्हाट्सएप किया जा रहा है, वह फ़र्ज़ी है. अगर कोई ग्राहक इस नंबर पर अपने बैंक खाते का ब्यौरा भेजता है तो इसके लिए बैंक या आरबीआई ज़िम्मेदार नहीं है. वही यह भी साफ़ किया है कि आरबीआई किसी से व्यक्तिगत तौर पर लेन देन नहीं करता है. इसलिए ऐसे किसी सूचना या सुविधा को नज़रअंदाज़ करें.
दरअसल बैंक खाता की जानकारी देने वाले व्हाट्सएप संदेश में सरकारी व निजी बैंकों के फ़र्ज़ी मोबाइल नंबर और काल सेंटर नम्बर भी दिये गये हैं. जिनपर बैंक ब्यौरा देने को कहा जाता है. जैसे ही बैंक संबंधी ज़रूरी जानकारी शेयर किया जाता है बैंक खाते से रूपए निकालने का रास्ता तैयार हो जाता है. इसी तरह आरबीआई के नाम पर क्रेडिट कार्ड की ब्रिक्री, मल्टी लेवल मार्केटिंग या पुरस्कार पाने वाले मेल से भी सचेत रहने को आगाह किया गया है.
आरबीआई ने यह भी कहा है कि अगर इंटरनेट बैंकिंग का ब्यौरा देने के लिए कोई मेल आरबीआई की तरफ़ से आता है ते यह ख़तरे का संकेत है. आरबीआई की ओर से ऐसे मेल नहीं किये जाते हैं. अगर ईमेल के ज़रिए लकी ड्रा में विदेशी कंपनी से इनाम जीतने या किसी आफर की विजेता बनने का मेल आए तो ऐसे किसी झांसे में फंसने की बजाए पुलिस या साइबर क्राइम आथरिटी में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं.

Monday, June 26, 2017

वाह ,क्या कमाल कर दिखाया HARYANA की इस छोरी ने?

सितारों  भरी चमकती शाम के बीच मुंबई के यशराज फिल्म स्टूडियों में रविवार की रात एक शानदार कार्यक्रम में हरियाणा की Manushi Chhillar साल 2017 की फेमिना मिस इंडिया चुनी गईं हैं . मिस इंडिया चुने जाने के बाद सोनीपत की इस डॉक्टर ने सबसे पहले बात की महिलाओं की और कहा कि सरोगेसी पर पाबंदी लगाना बेमायने है. मानुषी ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट थॉमस स्कूल से की है .
जम्मू कश्मीर की साना दुआ फर्स्ट रनर अप और बिहार की प्रियंका कुमारी सेंकड रनरअप रही. साना दुआ ने ट्रिपल तलाक को ख़त्म करने पर ज़ोर दिया. प्रतिभागियों को तीस दिनों के ट्रेनिंग के बाद प्रतियोगिता के आखिर में एक सवाल पूछा गया कि इन तीस दिनों का सबक क्या है? इस पर मानुषी ने जवाब दिया कि समझ आया है कि ज़िंदगी में सिर्फ़ अनिश्चतिता ही निश्चित है और मैं चाहूं तो दुनिया में बदलाव ला सकती हूं, दुनिया बदल सकती हूं. इस तरह दुनिया बदलने का भरोसा रखने वाली Manushi Chhillar की तकदीर पल भर में बदल गई उन्हें मिस इंडिया विजेता घोषित किया गया.
पिछले कई साल से मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स जैसे मुकाबलों में भारत की सुंदरियों को कई जगह नहीं मिल पाई है, लेकिन देश में मिस इंडिया और राज्यों और अलग-अलग शहरों होने वाले ब्यूटी कान्टेस्ट्स में लड़कियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. इस बार के मिस फेमिना इंडिया कान्टेस्ट में

साड़ी पर हिजाब, SOCIAL MEDIA पर क्यों हुआ विवाद?


इंडियन मूल की ब्रिटिश फैशन डिज़ाइनर आयुष केजरीवाल इन दिनों सोशल मीडिया के कुछ यूजर्स के निशाने पर हैं. आयुष की बनाई एक ड्रेस पर कुछ लोगों ने विवाद खड़ा कर दिया है. दरअसल आयुष ने साड़ी और हिजाब को मिक्स करके एक ड्रेस बनाई और मॉडल को पहनाकर उसकी तस्वीर इन्स्टाग्राम पर पोस्ट कर दी जिसमें उन्होंने कैप्शन दिया ‘Hijabs are very Stylish’. 
आयुष को ऐसा करते कुछ समय भी नहीं बीता था कि लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया. उनके अकाउंट पर कई हेट कमेंट्स पोस्ट कर उनकी आलोचना करनी शुरू कर दी. लोगों ने उनकी ड्रेस को धर्म से जोड़ना शुरू कर दिया और देखते ही देखते पोस्ट वायरल हो गई.
ऐसे-ऐसे कमेंट्स आए…
कुछ सोशल मीडिया ट्रोलर्स ने लिखा कि साड़ी हिंदू महिलाओं की पहचान है, इसपर हिजाब डालकर हिन्दुओं को नींचा दिखाने की कोशिश की जा रही है. डिज़ाइनर ने हिजाब को ज्यादा और साड़ी को ज्यादा महत्व दिया है और ऐसा करके डिज़ाइनर ने हिंदू धर्म के लोगों की भावनाओं के साथ धोखा किया है.
एक और यूजर ने लिखा, हमारे ब्यूटीफुल इंडियन कल्चर पर इस्लामिक कल्चर हावी करने की कोशिश नहीं करो.
आयुष ने भी दिया करारा जवाब…
जब हद से ज्यादा इस ड्रेस को लेकर विवाद होने लगा तो आयुष ने कमेन्ट करते हुए लिखा, ‘मैं किसी धर्म विशेष की भावना को आहत नहीं करना चाहता हूं, मेरे अकाउंट पर धर्म को लेकर नफरत फैलाने वाले, गाली-गलौज कर धमकाने वालों और ट्रोलबाजी करके माहौल ख़राब करने वालों के लिए कोई जगह नहीं. जियो और जीने दो. किसी के पहनावे पर कमेन्ट करने वाला कोई नहीं होता, कोई ये तय नहीं कर सकता कि किसको क्या पहनना चाहिए इसलिए अपनी गंदी सोच अपने पास रखें तो बेहतर है. मैं आपसे निवेदन करता हूं कि ऐसी घटिया बातें यहां न करें तो बेहतर है क्योंकि मैं ऐसी नॉनसेन्स बर्दाश्त नहीं कर सकता.’
आयुष ने ट्रोलिंग करने वालों को करारा जवाब देकर अपने अकाउंट से कमेन्ट disable कर दिए. वैसे नेगेटिव कमेंट्स के अलावा कुछ लोगों ने आयुष के इस ड्रेस क्रिएशन की तारीफ भी की है. कुछ डिज़ाइनर्स ने उन्हें बधाई देते कहा है कि कुछ नया करने के लिए आयुष हमेशा आगे रहने वालों में से हैं. वह अक्सर साड़ी के यूनिक डिज़ाइन बनाकर फेमस हो चुके हैं, उम्मीद है वो ट्रोलिंग से निडर रहकर बेहतरीन काम करते रहेंगे.

Saturday, June 24, 2017

बिहार की चंचल को क्यों हारने दी आपने ज़िंदगी की दौड़ ?


प्रतिभा ज्योति
एसिड अटैक सर्वाइवर चंचल पासवान ने इस क्रूर समाज को आखिर छोड़ दिया. बिहार में पटना के पास दानापुर के छितनामा गांव की बहादुर लड़की चंचल पासवान ने 22 जून को आखिरी सांस ली .अपने पर एसिड से हुए हमले और अन्याय के ख़िलाफ़ चंचल पांच साल तक लड़ती रही, लेकिन उसके अपराधियों को वो सज़ा नहीं मिल पाई जो मिलनी चाहिए थी . चंचल के पिता शैलेश पासवान ने कहा कि वो आखिरी दम तक बहादुरी से लड़ती रही,लेकिन अब मैं हार गया हूं .
मेरी किताब एसिड वाली लड़की पर काम करते हुए चंचल से मुलाकात हुई थी.मैं उससे मिलने उसके घर दानापुर भी गई थी ,लेकिन उससे अहम बात ये कि जब किताब रिलीज हुई तो वो बहादुर लड़की एक हज़ार किलोमीटर का सफर पार करके दिल्ली आ गई थी .उस समारोह में भी चंचल ने कहा था कि उसकी और एसिड अटैक के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने वालों की असली जीत तब होगी जब समाज में फिर से किसी को चंचल ना बनना पड़े.
चंचल अपने नाम से विपरीत गंभीर स्वभाव की थी और नपढ़,गरीब मजदूर परिवार की उस बेटी की सपना था कम्प्यूटर इंजीनियर बनना, वो कम्प्यूटर कोर्स भी कर रही थी. उसकी बहन सोनाली और चंचल दोनों शिद्दत से अपनी जिंदगी के अंधेरे को दूर करने में लगे थे,लेकिन मौहल्ले के चार लड़कों के लिए तो वो सिर्फ एक लड़की , एक जवान शरीर थी .एक लड़के ने उससे शादी करने कि जिद की,उसने मना कर दिया क्योंकि वो पढ़ना चाहती थी.उसकी इस ना का अंजाम हुआ उस पर एसिड अटैक .
2012 में अक्टूबर की हल्की सर्द रातों में दुर्गा पूजा के उत्सव की गर्माहट महसूस हो रही थी. 21 अक्टूबर की रात जब वो अपने घर की छत पर बहन सोनाली के साथ सो रही थी ,तो वो चारों लड़के आए और दो ने उसके हाथ पैर पकड़े, मुंह दबाया और एक ने बोतल से निकाल कर कटोरे में भर कर उस पर एसिड उंडेल दिया.लगा कि खौलता हुआ तेल उस पर उंडेला जा रहा है .उसके चिल्लाने की आवाज़ से सुनकर जब पिता शैलेश पासवान और मॉं सुनयना जब तक छत पर भागे तो देखा, चंचल बुरी तरह छटपटा रही थी .उसके चेहरे से धुंआ निकल रहा था .जैसे मोमबत्ती पिघलती है,उस तरह चंचल का चेहरा और पूरा शरीर पिघल रहा था .दूसरी बहन सोनम का बी हाथ और सीना जख्मी हो गया था. आंगन में लिटा कर बाल्टी भर भर कर पानी डाल तपिश कम करने की कोशिश की ..उन्हें समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ.पिता मदद के लिए मोहल्ले की तरफ भागे,लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आया.मानो पूरा मोहल्ला बुत बन गया था.ज़िंदा शरीरों के बुतों का मौहल्ला. वो उन्हें अस्पताल लेकर भागे ..भागते रहे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल. पटना के सबसे बड़े पीएमसीएच अस्पताल पहुंचे ,उसे आईसीयू में रखना ज़रूरी था ,लेकिन दो ज़िंदा इंसानों को मुर्दाघर में रखा गया क्योंकि आईसीयू सिर्फ वीवीआईपी लोगों के लिए होता है.
लंबी लड़ाई लड़ी मॉ-पिता ,चंचल और सोनम ने कुछ एनजीओ ने साथ दिया , कानूनी लड़ाई भी लड़ी . थोड़ी मदद मिली, तोड़ी नहीं मिली. बिहार के एनजीओ परिवर्तन केन्द्रकी वर्षा जावलेगकर और दिल्ली में एसिड अटैक कैंपेन चलाने वाले आलोक दीक्षित ने मदद की .चंचल के वकील सुरेश प्रसाद मिश्रा कानूनी लड़ाई लड़ते रहे.लेकिन अदालत ने आरोपी को कम उम्र का मानते हुए एक साल की सज़ा दी ,बाल सुधार गृह में भेज दिया गया उसे और वो अब चंचल के घर के सामने से शान से निकलता है अंगूठा दिखाते हुए, चरमराती न्याय व्यवस्था को और गिलगले समाज को,  लेकिन गांव वालों ने उसके जज़्बे को भले ही सलाम नहीं किया हो,मगर बहादुर चंचल फिर से कालेज जाने लगी थी.
चंचल तो अब नहीं है ,अब भी अगर आप जाग गए हैं, आपकी और हमारी आत्मा हमे कचोट रही है तो बस इतनी कोशिश कीजिए कि अब फिर किसी को चंचल की तरह से ना गुजरना पड़े .फिर कोई चंचल नहीं बने .
याद रखिए चंचल हमेशा दूसरे या पड़ौसी के घर की लड़की नहीं होती ,वो आपके घर में भी हो सकती है,यह चेतावनी है तो आप सिर्फ मोमबत्ती मत जलाइए दिल्ली के राजपथ और इंडिया गेट पर.खड़े होइए ,बोलिए, लड़िए, मदद कीजिए और कोशिश कीजिए कि फिर ऐसी कहानी ना लिखनी पड़े.

क्या कोई इंडियन एमपी संसद में ऐसे ब्रेस्टफीड करा सकती है ?



ऑस्ट्रेलियाई सांसद लेरिजा वाटर्स ब्रेस्टफीडिंग कराते हुए प्रस्ताव पेश करने वाली पहली सांसद बन गई हैं. ऐसा कर उन्होंने इतिहास रच दिया है. ऑस्ट्रेलिया की ग्रीन पार्टी की मेम्बर लेरीजा को दरअसल कोयला खदान में काम करने वाले मजदूरों में होने वाली फेफड़ों की बीमारी से सम्बंधित एक प्रस्ताव पेश करना था. इसी दौरान उन्हें अपनी तीन महीने की बेटी आलिया को ब्रेस्टफीड भी कराना था. ऐसे में लेरिजा ने दोनों काम साथ-साथ किए. वह खड़े होकर प्रस्ताव पेश करने का भाषण भी देती रहीं और आलिया को ब्रेस्टफीड भी कराती रहीं. 
ऐसा करते हुए उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है साथ ही कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं जिनमें संसद में मौजूद बाकी मेम्बर्स उनकी बेटी के साथ खेलते हुए दिख रहे हैं. 

संसद में पहले भी करा चुकी हैं ब्रेस्टफीडिंग
इसी साल मई में लेरिजा संसद में ब्रेस्टफीडिंग कराने की वजह से सुर्ख़ियों में आ चुकी हैं. दरअसल बेटी के जन्म के केवल दस हफ्ते बाद ही लेरिजा काम पर लौट आई थीं. संसद लौटने पर उन्होंने बेटी को वहीं ब्रेस्टफीडिंग कराई थी और उसकी तस्वीर ट्विटर पर शेयर कर चर्चा में आ गई थीं. 
लेरिजा ने लड़ी लड़ाई
फरवरी 2016  से पहले तक ऑस्ट्रेलिया संसद में बच्चों को ले जाने की अनुमति नहीं थी. चाहे महिला हो या पुरुष, वह ऐसा नहीं कर सकते थे लेकिन नियम बदले गए और फिर फरवरी 2016  के बाद से इसकी अनुमति दे दी गई. इस नियम में महिलाएं कार्यस्थल पर बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग भी करा सकती हैं और ऐसा करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता है. लेरिजा ने ही इस नियम को बनाने की मांग की थी. उस वक्त लेरिजा ने कहा था अगर हम संसद में और युवा महिलाएं चाहते हैं तो हमें नियम और उदार बनाने चाहिए, ताकि हाल ही में बच्चों को जन्म देने वाली मां और पिता सांसद बच्चों की परवरिश की अपनी भूमिका में और सामंजस्य बना सकें.
 ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मांओं को एक प्रॉक्सी वोट दिया गया था. इसके बाद ऑस्ट्रेलियन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने भी इस कानून को अनुमति दे दी थी. इसपर लेरिजा की सहयोगी सांसद कैटी गालाघर ने कहा था, ‘ये ऐसा पल है जिसके लिए हमें लेरिजा को धन्यवाद देना चाहिए. ऐसा दुनिया के सभी देशों की महिलाएं संसद में कर सकती हैं. इस पल को संसद में देखकर काफी अच्छा लगा. इससे महिलाएं अपने बच्चे को जॉब के दौरान अपने साथ ले जाने और वहां उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित होंगी.
आपको बता दें कि पहली बार इसी तरह का कानून पिछले साल आइसलैंड की संसद ने भी बनाया था. यहां महिला सांसद उन्नूर ब्रा कोनाराओस्दोत्तिर ने अपनी छह हफ्ते की बेटी को संसद में स्पीच के दौरान ब्रेस्टफीड कराया था. इसके अलावा संसद में स्तनपान कराने का नियम स्पेन और यूरोपियन पार्लियामेंट में पहले से ही है. 


Friday, June 23, 2017

बुज़ुर्ग मम्मी-पापा विदेश जा सकें इसलिए, passport अब सस्ते बनेंगें




विजय त्रिवेदी
अब पासपोर्ट हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में मिल सकेंगें . अभी तक पासपोर्ट सिर्फ़ अंग्रेज़ी भाषा में मिलते हैं.  भारत में पासपोर्ट एक्ट 1967 के पचास साल पूरे होने पर सरकार की ओर से एक डाक टिकट जारी किया गया है .सरकार का मानना है कि जब दुनिया के दूसरे देशों में पासपोर्ट में उनकी भाषा होती है तो फिर हमारे यहां अंग्रेज़ी के साथ हिन्दी क्यों नहीं हो. इस मौके पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पासपोर्ट को लेकर एक और बड़ा एलान किया कि अब 8 साल से कम उम्र के बच्चों और साठ साल से ज़्यादा उम्र के बुज़ुर्गों के पासपोर्ट बनवाने की फ़ीस में दस फ़ीसद की छूट भी मिला करेंगी .सरकार का मानना है कि अब बच्चे विदेशों में ज़्यादा नौकरियां कर रहे हैं तो वे चाहते हैं कि उनके बुज़ुर्ग माता पिता बी कभी उनके पास आएं ,इसलिए बुज़ुर्गों के पासपोर्ट फीस में कमी की गई है.
 पासपोर्ट विभाग ने अपनी तस्वीर बदलने के लिए कई कोशिशें की हैं . विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि महिलाओं के लिए खासतौर से दो बड़े बदलाव अब तक किए गए हैं ,पहला तलाकशुदा महिलाओं को अपने पासपोर्ट फार्म और पासपोर्ट में पूर्व पति का नाम लिखने की ज़रुरत नहीं है. सुषमा स्वराज ने कहाकि जब किन्ही भी वज़हों से पति को छोड़ दिया है ,तलाक हो गय़ा है

Wednesday, June 21, 2017

अपने बच्चों में भी डालिए YOGA HABITS


बदलती जीवनशैली और ख़ानपान के तौर तरीक़ों के बीच खुद को फिट रखने के लिए योग जरुरी है. यह सोचना कि योग केवल बड़ों के लिए या बीमार होने पर ही करना जरुरी है कहना गलत है. दरअसल यदि बच्चों में yoga habits बचपन से ही लग जाए तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता. यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरुरी है. 
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग बेहद जरुरी है. इसलिए योग को स्कूलों के पाठ्यक्रम

Tuesday, June 20, 2017

क्या फायदे हैं सूर्य नमस्कार के ?



योग के फायदे किसी से छिपे नहीं है. इससे न केवल शरीर स्वस्थ रखता है बल्कि मन भी तरोताजा रहता है.  डेली रुटीन में लोग कामकाज और भागदौड़ के कारण आसानी से तनाव के चपेट में आ जाते हैं. ऐसे में सूर्य नमस्कार आपको तनाव से पूरी तरह मुक्त कर सकता है और शरीर को भी निरोग बनाता है.योग गुरु आचार्य बालकृष्ण बताते हैं कि सूर्य नमस्कार के क्या फायदे है
सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार आपके शरीर और मन को संतुलित रखने, तरोताजा करने और ऊर्जा प्रदान करने के लिए बेहद कारगर है. रोज दिन की शुरूआत इससे करें. सूर्य नमस्कार में 12 सरल आसन होते  हैं.
सूर्य नमस्कार की विधि
दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हों.
2-सांस भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं.
3-अब सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें. हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं जमीन का स्पर्श करें.
4-सांस को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं. गर्दन को अब पीछे की ओर झुकाएं व कुछ समय रुकें.
5-अब सांस को धीरे-धीरे छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं जिससे दोनों पैरों की एड़ियां मिली हुई हों. पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें.
6-अब सांस भरते हुए दंडवत लेट जाएं.
7-अब सीने से ऊपर के भाग को ऊपर की ओर उठाएं जिससे शरीर में खिंचाव हो.
8-फिर पीठ के हिस्से को ऊपर उठाएं. सिर झुका हुआ हो और शरीर का आकार पर्वत के समान हो.
9-अब फिर चौथी प्रक्रिया को दोहराएं यानी बाएं पैर को पीछे ले जाएं.
10-अब तीसरी स्थिति को दोहराएं यानी सांस धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकें.
11-सांस भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर तानें और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं.
12-अब फिर से पहली स्थिति में आ जाएं.

(लेखिका ट्रैवलर, फोटोग्राफर और ब्लॉगर हैं.)

क्या आपने इन योगा ट्रेनर्स को फॉलो किया ?

आजकल की भागमभाग वाली जिंदगी में खुद को फिट रखने के लिए योग के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ रहा है. इसके साथ ही योग सीखाने के लिए एक्सपर्ट की जरुरत सबको महसूस होने लगी है. योगा के प्रति लोगों का बढ़ता क्रेज देखकर योगा ट्रेनर की अच्छी मांग हो गई है. हम आपको मिलवाते हैं ऐसी कई महिला योगा ट्रेनरों से जो लोगों को फिट रखने में अहम भूमिका निभा रही हैं. हजारों की संख्या में लोग इन योगा ट्रेनर के दीवाने हैं और उनके इंस्ट्रक्शन को पूरे मन से फॉलो करते हैं.
दीपिका मेहता
योग की दुनिया में दीपिका मेहता एक बड़ा नाम है. अष्टांग ट्रेनर दीपिका सेलेब्रिटीज को योगा की ट्रेनिंग देती है. इन्होंने दीपिका पादुकोण, ऐश्वर्या राय बच्चन और प्रियंका चोपड़ा को योग की ट्रेनिंग दी है. इंस्ट्राग्राम पर  90 हजार से ज्यादा इनके फॉलोअर हैं.
नताशा नोए
नताशा योगा सि
खाने के साथ-साथ बेहतरीन डांसर भी है. वे डांस थेरेपी देकर लोगों को फिट रखती हैं. वे इंस्ट्राग्राम पर तरह-तरह के पोज से लोगों को योग के टिप्स बताती रहती हैं. इनके भी 80 हजार फॉलोअर है.
राधिका बोस
राधिका बोस योगा ट्रेनर होने के साथ-साथ एक लेखिका भी हैं. वे फिटनेस टिप्स लिखती रहती हैं. वे प्रकृति के बीच अलग-अलग जगहों पर योग वाले अपने फोटो इंस्ट्राग्राम पर डालती रहती हैं. 36 हजार से ज्यादा इनके फॉलोअर्स है.
लौरा कासपरजेक

 लोग लौरा के योग टिप्स के दीवाने है. वे भी फोटोज के जरिए अपने फॉलोअर्स को योगा टिप्स देती रहती हैं. इनके 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर है.

हरियाणा सरकार क्यों दे रही है कालेज की लड़कियों को 45 दिन की छुट्टियां ?


बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा सरकार ने एक और अहम पहल की है .अब सरकार ने कालेज और यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाली शादीशुदा लड़कियों को प्रेगनेंसी होने पर 45 दिनों की छुट्टी देने का फैसला किया है. वे इसके लिए एक सेमेस्टर को छोड़ भी सकती हैं और एक साथ 45 दिन की छुट्टी उन्हें मिल सकेगी .
हरियाणा में हिसार की गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ सांइस एंड टेक्नोलोजी  ने यह योजना पिछले साल जनवरी में अपने यहां लागू की थी. अब हरियाणा सरकार ने इसे अपने प्रदेश के सभी कालेजों और यूनिवर्सिटी में लागू करने का फ़ैसला कर लिया है. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस पर अपनी मंज़ूरी दे दी है .
शादीशुदा लड़कियों को इन छुट्टियों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट देना होगा और अपने विभाग प्रमुख या कालेज के प्रिसिंपल से इजाज़त लेनी होगी. इसके साथ ही इम्तिहान में शामिल होने के लिए उन्हें एक्स्ट्रा क्लास में मौजूद रह कर अपनी अटेंडेंस पूरी करनी होगी.हरियाणा एक ज़माने तक लड़कियों को गर्भ में ही मारे जाने को लेकर बदनाम

Saturday, June 17, 2017

क्या आप मदद करेंगें ,हाथ बढ़ाइए प्लीज

प्रतिभा ज्योति:
नोएडा की रहने वाली ममता (बदला हुआ नाम) ने इसी साल 12वीं में 94फीसदी अंक हासिल किया है. लेकिन वो भविष्य के रंगीन सपने बुनने के बजाए जिंदगी और मौत से जूझ रही है. नोएडा के नेहरु इंटरनेशनल स्कूल से 12वीं पास करने के बाद ममता को जयपुर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला भी मिल गया है लेकिन किसी की बदनीयती ने उसे मौत के मुंह में धकेल दिया है.
19 मई की रात ममता नोएडा सेक्टर 35 के अपने घर में  साढ़े 12 बजे रात में बाथरुम के लिए अपने कमरे से बाहर निकली थी लेकिन उसके कुछ देर बाद वह बेहोश हालात में मिली. ममता के पिता अरविंद का कहना है कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनकी बेटी बेहोश पड़ी है. उन्हें किसी पड़ोसन ने बताया. उन्होंने देखा कि उनकी बेटी के कान से खून बह रहा था, बाल बिखरे हुए थे. अरविंद के मुताबिक उनकी बेटी को गहरी चोट लगी है. वे बेटी को पहले नोएडा के शिवालिक हॉस्पिटल गए जहां से फिर मैक्स पटपड़गंज हॉस्पिटल में ले कर आए.
क़रीब 22 दिनों तक वहां रहने के बाद भी जब उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो बेटी को एम्स ले कर आए. अरविंद का कहना है कि एम्स में उनकी बेटी को एडमिट नहीं किया जा रहा क्योंकि डॉक्टरों का कहना है कि इसका कोई इलाज नहीं है. वे बताते हैं कि उन्हें समझ ही नहीं आया है कि उनकी बेटी के साथ हुआ क्या? अपने कुछ गांववालों की मदद से उन्होंने तीन दिन पहले नोएडा सेक्टर 24 में एफआईआर दर्ज कराया है. गांववालों की मदद से ही वे अपने घर के सामने राशन वाले की दुकान में लगे सीसीटीवी में घटना की पूरी रिकॉर्डिंग भी देख ली है. उनका कहना है कि सीसीटीवी में दिख रहा है कि कोई लड़का टार्च जला कर उनकी बेटी को बाथरुम जाते देख रहा है और किसी से मोबाइल पर बात कर रहा है. उनका कहना है कि आरोपी को यह पता ही नहीं चला कि सीसीटीवी कैमरे में उसकी करतूत क़ैद हो रही है.
बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले अरविंद बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए दिल्ली आए थे. इलेक्ट्रिशियर का काम करने वाले इस पिता ने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की कोशिश की लेकिन बेटी की यह हालत देखकर उन्हें  दिल्ली आने के अपने फैसले पर अफसोस हो रहा है. वे फिलहाल अरविंद अपनी बेटी को न्याय दिलाने और उसकी जान बचाने के प्रयास में जुटे हैं. वुमनिया भी आपसे अपील करता है कि एक होनहार बेटी को बचाने के लिए आप आगे आईए….

Friday, June 16, 2017

योगी के बाद गोरखपुर की सीट कौन संभालेगा ?


यूपी की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाद क्या कोई और गुजराती आने वाला है? बीजेपी के राजनीतिक सर्किल में एक गुजराती महिला की एंट्री योगी आदित्यनाथ की जगह होने की चर्चा ज़ोरों पर है. यूपी में विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत मिलने के बावजूद वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अभी एमएलए नहीं हैं क्योंकि उन्होंनें विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था. उन्हें सांसद पद से इस्तीफा देकर विधानसभा चुनाव लड़ना होगा.
योगी आदित्यनाथ सीएम होने के साथ-साथ अभी लोकसभा सांसद भी हैं. 17 जुलाई को राष्ट्रपति का चुनाव होना है. माना जा रहा है कि इस चुनाव के बाद वे सांसद पद से इस्तीफा दे देंगे. योगी के बाद गोरखपुर से सांसद कौन होगा या कौन लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में मैदान में होगा इस पर कयास लगाये जाने लगे हैं.
गोरखपुर संसदीय सीट योगी आदित्यनाथ की अजेय सीट मानी जाती है. इस सीट पर  गोरखनाथ मंदिर का कई दशक से कब्जा रहा है. योगी से पहले उनके गुरु

Thursday, June 15, 2017

प्रेग्नेंट हैं तो सरकार की सुनिए- ‘प्रेग्नेंट महिलाएं न खाएं मीट, न करें सेक्स’

‘महिलाएं प्रेग्नेंसी में मीट न खाएं, कंसीव करने के बाद सेक्स न करें, गंदी आदतों और विचारों से दूर रहें, आध्यात्म में मन लगाएं और घर की दीवारों पर सुंदर तस्वीरें लगाएं..’.ये हम नहीं कह रहे हैं.  केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं को ऐसे सुझाव दिए हैं.

खबरों के मुताबिक योग दिवस मनाए जाने के बीच भारत सरकार के सहायता प्राप्त संस्था काउंसिल फॉर रिसर्च इन योगा एंड न्यूरोपैथी ने एक बुकलेट ‘मदर एंड चाइल्ड केयर’ जारी की है जिसमें प्रेग्नेंट महिलाओं को यह सुझाव दिए गए हैं. इस बुकलेट को आयुष मंत्रालय के राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने पिछले सप्ताह राष्ट्रीय स्वास्थय संपादकों के सम्मेलन में जारी किया था, जिसकी एक्सपर्ट्स आलोचना कर रहे हैं.
प्रोटीन की कमी, कुपोषण और एनिमिया प्रेग्नेंट महिलाओं के हेल्थ के लिए चिंता का विषय होता है और इसलिए मीट भी खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसमें प्रोटीन और आयरन भरपूर मात्रा में मिलता है.
‘वहीं सेक्स की बात की जाए तो नार्मल प्रेग्नेंसी में यह पूरी तरह सेफ है. कुछ केस

एक प्यार जो बदल गया क्रांति में

विजय त्रिवेदी
एनडीए सरकार भले ही हर घर में शौचालय बनाने के अपने मिशन में अभी तक पूरी तरह सफल बेशक नहीं हुई हो लेकिन सिनेमा के जरिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस स्वच्छता मिशन को एक बड़ा सहारा मिल सकता है. एक सच्ची घटना पर आधारित टॉयलेट एक प्रेम कथाफिल्म बना कर प्रोड्यूसर ने एक गंभीर समस्या को समाज के सामने रख दिया है . अक्षय कुमार की आने वाली यह फ़िल्म रिलीज तो पन्द्रह अगस्त पर होगी.
अभिनेता अक्षय कुमार ने फ़िल्म और इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री से भी मुलाकात भी कर ली है. एक्सपर्ट मानते हैं कि हो सकता है कि वे इस फ़िल्म के बहाने में राजनीति के गलियारों में आने के रास्ते भी टटोल रहें हों क्योंकि यह विषय प्रधानमंत्री की प्राथमिकता वाला है .
अक्षय कुमार इस फिल्म में केंद्र सरकार की मुहिम स्वच्छ भारत अभियानको बढ़ावा दे रहे हैं. फिल्म के जरिए एक जरूरी मुद्दा उठाया गया है जो अरसे से महिलाओं के लिए खास तौर पर गांव की महिलाओं के लिए तकलीफदेह है. यूं तो सरकार अब तक करोड़ों घरों में शौचालय बनवा चुकी है लेकिन करोड़ों लोग अब भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं. जिससे सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है. शर्म और संकोच से शौच जाती महिलाओं को ये परेशानी कई तरह की बीमारियां देती है.
फ़िल्म में अक्षय कुमार का डायलॉगअब बीवी पास

Search