Thursday, November 26, 2015

Book on Vajpayee...(4)

1977....संसद में एक राजकुमारी की कहानी.....। एक सुंदर राजकुमारी को अपने रूप पर बहुत घंमड था। उसके लिए कोई भी  शादी का प्रस्ताव लेकर जाता तो उसे खारिज़ कर देती । साल बीतते गए , कुछ साल बाद राजकुमारी ने शादी करने

Saturday, November 21, 2015

book on vajpayee- (3) 


वित्त मंत्री बनने वाले जसवंत सिंह के लिए 18-19 मार्च की दरमियानी रात राजनीतिक तौर पर कत्ल की रात थी ।... वाजपेयी ने लिस्ट बनाते वक्त अपने हाथ से कितने नाम काटे , कितने जोड़े , कितनी बार बदले गए और क्यों बदले गए .....

डिनर टेबल पर बैठे ही थे कि वाजपेयी की बेटी नमिता ने आकर बताया कि संघ प्रमुख सुदर्शन जी मिलने  आए हैं । इतनी ही देर में सुदर्शन जी अंदर तक आ गए। कंचन उठ कर बाहर चले गए। 15-20 मिनट बात हुई । सुदर्शन जी के जाने के बाद वाजपेयी ने कंचन दासगुप्त से कहा कि आपको सूची दोबारा बनानी पड़ेगी । 



Thursday, November 19, 2015

book on vajpayee


कुंभकरण  जाग गया ...

कुंभकरण जागने की ख़बर दुनिया को मिली तो सबके मानो होश उड़ गए ...और कुंभकरण के जागने के साथ ही हुई थी  धमाकेदार एंट्री , सात, रेस कोर्स रोड़ यानी भारतीय प्रधानमंत्री का सरकारी आवास ।
11 मई 1998,  इस सरकारी आवास पर इससे पहले  कभी किसी प्रधानमंत्री की ऐसी धमाकेदार एंट्री नहीं हुई थी बल्कि यहां क्या दुनिया के किसी प्रधानमंत्री या शासन प्रमुख ने ऐसी एंट्री नहीं की होगी ।
 कुंभकरण को मेजर जनरल पृथ्वीराज ने जगाया था ,

Tuesday, November 17, 2015

book on vajapyee -coming soon


पश्चिम बंगाल के छोटा मिदनापुर के छोटा अंगाड़िया इलाके में हिंसा हो गई , काफी लोगों की जान गईं । ममता बनर्जी बहुत गुस्से में थीं । वे पश्चिम बंगाल में लेफ्ट पार्टी  की बुद्धदेब भट्टाचार्य की सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर रही थी ,लेकिन एनडीए सरकार में कोई सुनवाई नहीं हुई । ममता  प्रधानमंत्री वाजपेयी से मिलने दिल्ली पहुंचीं और अपने झोले में से  हडिड्यां  और खोपड़ियां निकालने लगीं और एक-एक करके उन्हें वाजपेयी के सामने टेबल पर रखने लगीं तो वाजपेयी को यकायक समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा  है ।

 फिर वाजपेयी ने कहा कि ये तो वाकई गंभीर मामला है लेकिन राष्ट्रपति शासन लगाना तो गृह मंत्रालय का काम है , उनकी सिफारिश पर ही तो कैबिनेट फैसला करेगी , इसलिए आप आडवाणी जी से मिलिए । ममता गृह मंत्री आडवाणी से मिलीं  । आडवाणी ने राष्ट्रपति शासन लगाने का भरोसा तो नहीं दिया ,लेकिन सीबीआई जांच के आदेश दे दिए । ममता नाराज़ हो गईं , उन्हें लगा कि वाजपेयी तो तैयार हैं  लेकिन  आडवाणी  तैयार नहीं हुए क्योंकि  उनकी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य से दोस्ती है ।

Monday, November 16, 2015


सूर्यास्त



अक्सर खौफ सा होता है मुझे
जब देखती हूँ सूर्यास्त को...
बालकनी में खड़े होकर धीरे धीरे नीचे झुकते सूरज को
देखती हूँ..और महसूस करती हूँ
अपने वजूद को खोने का...
ये खौफ उम्र के साथ बढ्ने लगा है

सूरज के उगने और डूबने का
सिलसिला चलता रहेगा...
और उसके साथ हीं फैलती रहेंगी
असंख्य रश्मियां..मगर कभी ऐसा भी हो
कि ये 'रश्मिकहीं सदा के लिये खो जाए
और उसका वजूद किन्हीं अँधेरों में
मिल जाए...पर मेरे दोस्तों
एक 'रश्मिके मिट जाने से 
जहां में अंधेरा नहीं होता...
प्रकृति अपनी नियति के साथ 
चलती रही है...चलती रहेगी...!!!

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