Tuesday, September 10, 2013

chiddmbaram vs pranab -has chids lied in parl



विजय त्रिवेदी


क्या वित्त मंत्री चिदंबरम ने संसद को गुमराह किया

देश के बदतर होते मौजूदा आर्थिक हालात के लिए आखिरकार कौन ज़िम्मेदार है , मौजूदा वित्त मंत्री पी चिदंबरम या फिर पूर्व वित्त मंत्री और मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ।

 एनडीए सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने तो इसके लिए सदन में चिदंबरम के २००८-०९ में पहले कार्यकाल को ज़िम्मेदार ठहराया है लेकिन चिदंबरम ने इसके लिए २०१०-११ में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को ज़िम्मेदार माना है ।


राष्ट्रपति आज अपनी तरफ से तो कोई सफाई संसद में नहीं दे सकते ,लेकिन प्रधानमंत्री की चुप्पी का माने क्या ये है
कि सरकार इसके लिए प्रणब मुखर्जी को ज़िम्मेदार मानती है । चिदंबरम ने संसद में कई बार बहस के दौरान माना कि तब के वित्त मंत्री की नीतियों की वजह से हम खराब आर्थिक हालात में पहुंच गए हैं और सरकार ने इस पर मुखर्जी का कोई बचाव नहीं किया है ।

 क्या चिदंबरम सदन को गलतबयानी से गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे या फिर प्रणब मुखर्जी से अपनी पुरानी अदावत निभा रहे हैं ,क्योंकि दोनों के बीच रिश्तों की खटास नई नहीं है ।संसद का मानसून सत्र भले ही खत्म हो गया है लेकिन बिगड़ते आर्थिक हालात की चिंगारी राजनीतिक रिश्तों को भी झुलसा सकती है ।

चिदंबरम ने ही बोए बीज

यशवंत सिन्हा ने रुपए की गिरावट पर बहस के दौरान आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार पालिसी पैरालिसिस, गलत नीतियों और कमज़ोर नेतृत्व से जूझ रही है और इन्हीं वजहों से हालात खराब हुए हैं ।


 सिन्हा का आरोप है कि इन सब गड़बड़ियों के बीज तो चिदंबरम के 2008-09 के कार्यकाल में ही बो दिए गए थे ,लेकिन चिदबंरम ने संसद के मानसून सत्र में कहा कि इसकी वजह 2010-11 में लिए गए वे फैसले हैं जो तब के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लिए थे ।

मुश्किल पिच मिला

पिछले 18 साल में रुपए की भारी गिरावट पर बहस के दौरान वित्त मंत्री चिदंबरम ने राज्यसभा में सफाई दी कि इसकी वज़ह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय हालात ही नहीं है बल्कि घरेलू कारण भी रहे हैं । 2009 से 2012 तक के प्रणब मुखर्जी के वित्त मंत्री के कार्यकाल को निशाना बनाते हुए चिदबंरम ने कहा था कि बढ़ता हुआ वित्तीय गाटा और कंरट अकाउंट डेफिसिट हमें पिछले फैसलों से मिला है । हमें इस बात की सज़ा नहीं मिलनी चाहिए कि ये सब मौजूदा नीतियों की वज़ह से हो रहा है जबकि इसकी असली वज़ह पिछले कार्यकाल से जुड़ी हुई है ।

 लोकसभा में अपने भाषण में चिदंबरम ने एक बार फिर प्रणब मुखर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले साल एक अगस्त को जब मैंने वित्त मंत्रालय का कामकाज संभाला था तब मैं जानता था कि मुझे मुश्किल मैदान मिला है जिसमें वित्तीय घाटा बहुत बढ़ा हुआ है और करंट अकांउट डेफिसिट सीमा पार कर चुका है । जबकि जिन फैसलों का ज़िक्र चिदंबरम ने किया वे प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल के दौरान हुए ही नहीं थे ।

अब भी तेज है बुखार इकानमी को

दूसरी तरफ पूर्व वित्त् मंत्री यशवंत सिन्हा का कहना है कि भले ही सरकार कहे कि आज के हालात की तुलना 1991 से नहीं की जा सकती लेकिन तब करंट अकांउट डेफिसिट जीडीपी का 2.5 फीसद था जो अब बढ़कर पांच फीसद हो गया है । औद्योगिक विकास दर लगातार घट रही है ।

2011 -12 में औद्योगिक विकास दर जहां 3.5 फीसद थी और वो अब और घटकर सिर्फ 2.5 फीसद रह गई है ।उन्होंने कहा कि भले ही वित्त मंत्री ये कहें कि करंट अंकाउट डेफिसिट अब 5 फीसद पर ही थमा हुआ है तो ये वैसे ही है जैसे कोई डाक्टर कहे कि उसकी दवा की वजह से बुखार 105 डिग्री से घटकर 103 डिग्री हो गया है ,लेकिन ये तब भी बहुत ज़्यादा है ।

 सिन्हा ने इस बात को दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि मौजूदा सरकार पूर्व वित्त मंत्री और मौजूदा राष्ट्रपति को निशाना बना रही है जो इस पर अपनी सफाई नहीं दे सकते ।

उन्होंने कहा कि हमनें देश के आर्थिक हालात को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन भी दिया है ,लेकिन प्रधानमंत्री की उनको लेकर चुप्पी हैरानी वाली है ।
समाप्त ।

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