Monday, September 9, 2013

baba ramdev-धर्म सत्ता में गिरावट


विजय त्रिवेदी

साधुओं को भी बहू बेटियों से अकेले में नहीं मिलना चाहिए

योग गुरु बाबा रामदेव के साथ ख़ास मुलाक़ात

वे साधु हैं । योग गुरु है । आध्यात्मिक चिंतन करना और उसके लिए कोशिश करना उनकी फितरत है । समाज में सुधार करना नैतिकता को स्थापित करना और विवेकशील बनाना उनकी इच्छा है ।कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने में लगे हैं ।

 सरकार उनसे नाराज़ रहती है अक्सर राजनीतिक दल खुश नहीं रहते और सोशल एक्टिविस्ट उन्हें अपना ताकतवर प्रतिद्वन्दी मानते हैं । चोला भगवा है,साधना योग की है और इरादा सत्ता परिवर्तन का ,क्योंकि उनके मुताबिक सत्ता में बदलाव के बिना अब समाज में बदलाव नहीं होगा । बेबाक बोलना उनका मिजाज़ है और बेखौफ़ होना

उनकी प्रकृति योग गुरु बाबा रामदेव


सवाल साधु और संत समाज को रोशनी माना जाता है कि उसके बताए रास्ते पर सोसायटी चले ,लेकिन आपको नहीं लगता कि आजकल उस दीए की रोशनी कमज़ोर पड़ने लगी है ।

बाबा रामदेव – साधुओं ने इस समाज को रोशनी दी है उसका मार्ग प्रशस्त किया है ,लेकिन ये पहली बार नहीं है कि जब धर्म सत्ता पर सवाल खड़े किए गए हैं ।

 समाज में धर्म और राजसत्ता दोनों ही अलग अलग तरह की रोशनी देने का काम करते हैं और आज दोनों पर ही गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं निराशा है धर्म के नाम पर आडम्बर पनप रहे हैं । ऐसे में दोनों सत्ताओं की ज़िम्मेदारी है कि वे लोगों को निराश ना करें ।

सवाल मुझे लगता है कि आप राजसत्ता के बहाने धर्म सत्ता और साधु समाज को बचाने की कोशिश कर रहे हैं ।


बाबा रामदेव – नहीं नहीं मुझे इस बात को कहने में कोई हिचक नहीं है कि धर्म सत्ता में गिरावट आई है पतन हुआ हैबल्कि हद से ज़्यादा गिरावट आई है । मैं ये भी मानता हूं कि कानून सबके लिए बराबर है लेकिन एक मामला सामने आने से सब पर निर्णय करने की स्थिति ठीक नहीं हैं 

 कहते हैं कि गंदगी को जितना खोदोगे उतनी ही दुर्गंध बढ़ेगी तो उससे कोई फायदा नहीं हैं । कानून अपना काम करेगा उससे पहले निर्णय पर पहुंचना ठीक नहीं है ।

सवाल क्या ये मानूं कि आप आसाराम को बचा रहे हैं ।

बाबा रामदेव – मैं जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता । मैं ना बचा रहा हूं और ना ही विरोध में खड़ा हूं । मैं तटस्थ हूं साधु और संत समाज कानून का सम्मान हमेशा करता है ।

 आसाराम के शिष्यों का भी कहना है ।बस इस मामले में मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए जब तक कोई बात कानूनन तय नहीं हो जाती तब तक सब्र रखना चाहिए और इसमें क्या गलत है ।

सवाल कहा जा रहा है कि साधु संत फकीरों के लिए कोई आचरण संहिता या आचार संहिता और एक नेशनल गवर्निंग बाडी होनी चाहिए ,क्या आप उससे सहमत हैं ।

बाबा रामदेव – कुछ टीवी चैनलों पर और मीडिया में साधु संतों को लेकर एकतरफा बातें हो रही हैं । पहली बात तो ये है कि आचार संहिता और गवर्निंग बाडी की परपंरा सदियों से बनी हुई है और उसमें ज़रुरत के हिसाब से बदलाव भी होते रहे हैं ।

 देश का मौजूदा कानून भी सबके लिए बराबर है और उसके हिसाब से कारवाई होनी चाहिए और साधु संत समाज भी ऐसा ही मानता है । मैं समझता हूं कि साधु के जीवन के दो बड़े पहलू हैं पहला उसकी साधुता और साधना और दूसरा साधु द्वारा सेवा और देश समाज को जागरुक विवेकशील बनाना।

मुझे लगता है कि साधुओं को उस आचरण संहिता को मानना चाहिए और जो उसके अनुरुप काम ना करे तो उस पर कार्रवाई ही नहीं होनी चाहिए बल्कि शिष्यों को भी उसका विरोध करना चाहिए ।


सवाल साधु समाज में महिलाओं के साथ व्यवहार को लेकर भी समाज में काफी चर्चा हो रही है और तकलीफ भी है क्योंकि समाज को आप पर यानी साधु समाज पर भरोसा है ।

बाबा रामदेवये भी आचार संहिता का हिस्सा है कि साधुओं को भी बहूबेटियों ,महिलाओं से एकांत में नहीं मिलना चाहिए,लेकिन इस बात को बहुत बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है । 

हमनें लाखों महिलाओं के पैर पूजन किए उस पर कोई चर्चा नहीं करना चाहता । उसे ना तो आप टीवी पर दिखाते हैं और ना ही अखबारों में ठीक से जगह देते हैं ।

सवालअब बात राजसत्ता की यानी राजनीति कीआपने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम को ज़ोरदार तरीके से शुरु किया था लग रहा है कि वो मुहिम अब ढीली पड़ रही है ।

बाबा रामदेव – भ्रष्टाचार को लेकर भटकाव का सवाल ही नहीं होता । हम उसके खिलाफ पूरे देश में मुहिम चला रहे हैं । आंदोलन कर रहे हैं ,लेकिन हकीकत ये है कि राजसत्ता ने अपना दायित्व ठीक से नहीं निभाया इसीलिए देश आज बड़े संकट के दौर से गुज़र रहा है और हर क्षेत्र में आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है ।

 रुपए की कीमत और बाजा़र पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है । कालेधन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी हालात खतरनाक हो रहे हैं इसलिए सत्ता और व्यवस्था में परिवर्तन की ज़रुरत है ।


सवाल -मेरा सवाल ये है कि भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ अलग अलग स्तर पर आंदोलन हो रहा है ,क्या ये बिखराव की स्थिति नहीं है आप सब एक साथ होते तो ।

बाबा रामदेव – ये बात ठीक है कि भ्रष्टाचार और काला धन एक बहुत बड़ा मुद्दा है । कांग्रेस की सरकारों यदि काला धनभ्रष्टाचार और भ्रष्ट व्यवस्था पर काबू रखती तो आज देश अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में जीडीपी से लेकर प्रति व्यक्ति आमदनी तक कम से कम दस गुणा आगे होता ,लेकिन कांग्रेस ने और उसकी सरकारों ने देश को लूटने की खुली छूट दे रखी है । 

 पूरे देश में इसके खिलाफ माहौल है और ये ठीक है कि अगर सब लोग एक मुद्दे पर एक साथ हो जाएं तो उसका नतीजा बहुत अच्छा हो सकता है ,लेकिन बहुत बार ये मुमकिन नहीं हो पाता और फिर बी अलग अलग लोग अलग संगठन अपने अपने स्तर पर काम कर रहे हैं बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और उन्हीं कोशिशों का नतीजा है कि उसके खिलाफ पूरे देश में माहौल बन रहा है ।

सवाल आप कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं ,लेकिन उसका राजनीतिक पर्याय क्या है क्या आपको लगता है कि नरेन्द्र मोदी सारी बीमारियों का इलाज हैं ।

बाबा रामदेव – देश में कमज़ोर गवर्नेंस के कारण कोई साहसपूर्ण और सही फैसला सरकार नहीं कर पा रही । कांग्रेस से देश की कोई उम्मीद नहीं क्योंकि देश की दुर्दशा और दरिद्रता के लिए कांग्रेस ही मुख्य रुप से ज़िम्मेदार है ।

कांग्रेस से किसी तरह के बदलाव या हालात में सुधार की उम्मीद करना तो बेमानी है तो कोई ना कोई रास्ता ढूंढना ही होगा इसके अलावा कोई इलाज नहीं हैं देश को बचाने का । ऐसे हालात में राष्ट्र के नेतृत्व के लिए एक महानायक की ज़रुरत है ।

 नरेन्द्र मोदी पर देश की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि उन्होंने एक दशक से ज़्यादा राजनीति के अपने कार्.काल में एक आदर्श शासक की भूमिका निभाई है और मैं मोदी की मांग नहीं कर रहा हूं । देश से आवाज़ उठ रही है मोदी के लिए ।

सवाल मैंने सुना है कि नरेन्द्र मोदी ने खुद कहा है कि वो पीएम बनने का सपना नहीं देख रहे और वे 2017 तक गुजरात की सेवा करना चाहते हैं ।

बाबा रामदेव – मोदी जी ने बिलकुल ठीक कहा है कि वे पीएम बनने का सपना नहीं देख रहे कुछ करने का सपना देख रहे हैं और वे लगातार जनता के देश के हित का काम करते रहे हैं । 

पिछले कुछ सालों में विचारधारा और सिद्दान्तों को लेकर सभी जगह पर कमी आई है और व्यक्तियों ने भरोसा तोड़ा है । ऐसे में मोदी पर लोगों को भरोसा है कि वे बदलाव ला सकते हैं हालात बेहतर बना सकते हैं ।

 मुझे लगता है कि मोदी का जो कुछ करने का इरादा है वो देश की तस्वीर बदल सकता है और मैं फिर कह रहा हूं कि ये देश मोदी को पीएम बनाना चाहता है उनमें भरोसा जताना चाहता है ।

सवाल लेकिन देश की बात तो बाद में है अभी तो बीजेपी में भी बहुत से नेता मोदी को पीएम पद का दावेदार बनाने को तैयार नहीं हैं बहुत विरोध हो रहा है ।कैसे होगा सपना पूरा ।

बाबा रामदेव – नेतृत्व को लेकर बीजेपी में ज़रुर प्रश्न है ,सवाल हैं और वो इसलिए क्योंकि बीजेपी एक खानदान की पार्टी नहीं है लोकतांत्रिक ,विचारधारा और सिद्धान्तों की पार्टी है ,हालंकि उसमें भी सुधार की ज़रुरत है । 


बीजेपी में भी अगर कुछ लोग मोदी के नाम का विरोध कर रहे हैं तो ये इस बात का सबूत है कि बीजेपी में लोकतंत्र ज़िंदा है और वो सिर्फ एक परिवार की पार्टी नहीं हैं जहां लोकतंत्र नाम की कोई चीज़ नहीं ।


पत्रिका आखिरी सवाल – आप किसके साथ हैं मोदी के साथ या बीजेपी के
बाबा रामदेव हम मोदी के साथ हैं ,मोदी नहीं तो बीजेपी का समर्थन नहीं ।
समाप्त ।
विजय त्रिवेदी ,
फोटो गणेश बिष्ट
सौजन्य- राजस्थान पत्रिका

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