Monday, July 8, 2013

exclusive intv wd Ajay maken -मोदी से डरने का सवाल नहीं


विजय त्रिवेदी

कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रभारी अजय माकन से मुलाक़ात
मोदी से डरने का सवाल नहीं
 

कांग्रेस का नौजवान चेहरा ,तेजतर्रार, आकर्षक लेकिन आक्रामक,ज़ुबान में मिठास लेकिन हमलावर, तेज़ी के साथ चौकन्नापन , विरोधी दलों पर निगाह ,अपने दल की बात दमदार तरीके से आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी ।कांग्रेस आलाकमान ने शायद इसीलिए पिछले प्रभारी जनार्दन दिवेदी से 20 साल कम उम्र के युवा कांग्रेसी को महासचिव के साथ मीडिया की ज़िम्मेदारी सौंप दी क्योंकि अगली चुनावी लड़ाई का अहम हिस्सा होगा मीडिया ।ग्रेजूएशन से पहले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का अध्यक्ष, सिर्फ 39 साल की उम्र में
दिल्ली विधानसभा का अध्यक्ष और केन्द्र में कई मंत्रालय संभालने का अनुभव। कांग्रेस के महासचिव और संचार विभाग के प्रभारी अजय माकन ।
सवाल- कांग्रेस और चुनावी साल में एक अहम ज़िम्मेदारी संभालने के लिए बधाई ।फूड सिक्योरिटी के लिए आप अध्यादेश लेकर आए हैं ,ज़्यादातर लोग इसे वोट सिक्योरिटी बिल कहते हैं ।
माकन- कांग्रेस ने 2009 के घोषणापत्र में वादा किया था फूड सिक्योरिटी बिल का, 22 दिसंबर 2011 को संसद में रखा । संसदीय समिति की रिपोर्ट आई , फिर 20 मार्च 2013 को बजट सत्र में रखा ,लेकिन विपक्षी दलों ने इस पर चर्चा होने ही नहीं दी । 82 करोड़ लोगों को भोजन की सुरक्षा की कानूनी गारंटी का सवाल है । ये उन्हें कानूनी अधिकार देता है । इसके साथ ही बिल में 73 बदलाव करके अध्यादेश लाया गया है जिसमें गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और बच्चों को पौष्टिक आहार मिले, इस बात का ध्यान रखा गया है । केन्द्र ने इस पर सभी राज्यों से दो दो बार चर्चा की । अध्यादेश में राज्य सरकारों की मांग पर ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा और बेनीफिशयरी को चिन्हित करने के साथ उसके लिए मापदंड तय करने का अधिकार भी दिया गया है ।

सवाल - लेकिन अध्यादेश क्यों , क्या आपको संसद पर भरोसा नहीं और फिर इसे भी तो संसद में लाना ही पड़ेगा ।
माकन – अध्यादेश लाने की ज़रुरत इसलिए पड़ी क्योंकि विपक्ष पर भरोसा नहीं था कि वो इसे मानसून सत्र में भी रखने देगा और पास होने देगा । अब मानसून सत्र में 6 हफ्तों में संसद को इस पर फैसला करना होगा ,क्योंकि बजट सत्र में विपक्ष ने इस पर बहस होने ही नहीं दी जबकि यह एक कानूनी हथियार है भोजन की गारंटी के लिए ।इसका वोट से कोई जोड़ देखना बेमायने है । य़े कांग्रेस का वादा था और हमें पांच साल के भीतर इसे पूरा करना था । अगले 6 महीने में इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा ।

सवाल - कांग्रेस के चुनावी वादे में कई और बिलों पर भरोसा दिलाया गया था जैसे भूमि अधिग्रहण बिल , लोकपाल बिल , उन पर क्या हो रहा है ।
माकन – भूमि अधिग्रहण बिल को भी हम संसद के मानसून सत्र में चर्चा कर पास कराना चाहते हैं क्योंकि ये किसानों के हिता का बिल है और लोकपाल बिल भी कांग्रेस की प्राथमिकता है ।हम कोशिश करेंगे कि ये दोनों बिल पास हो जाएं । लोकपाल बिल तो लोकसभा में पास होने के बाद से राज्यसभा में है ।
सवाल- क्या आपको लगता है कि मानसून सत्र में विपक्षी दल ये बिल पास होने देंगें और आप काम कर पाएंगें ।
माकन – संसद में विपक्ष का ट्रैक रिकार्ड देखा जाए तो कुछ कहा नहीं जा सकता । इसीलिए अध्यादेश जनता की भलाई को ध्यान में रखकर ही लाया गया है और अगर उसे पास होने से कोई रोकेगा तो जनता के सामने उसे जवाब देना होगा ।


सवाल - कुछ लोग तो कहते हैं कि कांग्रेस डर गई है , कुछ कहते हैं कि कांग्रेस को मोदीमैनिया हो गया है , क्या नरेन्द्र मोदी से डरते हैं आप .
माकन – मोदी से हमारे डरने का सवाल पैदा कहां होता है । अभी तो मोदी को अपनी पार्टी में स्वीकार्यता बनानी है । मोदी की जब गोवा में ताजपोशी हुई तो आडवाणी बीमार पड़ गए, इस्तीफा दे दिय़ा , स्वार्थी कहा । सुषमा स्वराज गोवा से रुठकर दिल्ली लौट आईं । यशवंत सिन्हा बगैर रोकटोक के आए दिन बयान देते रहते हैं । गोवा के मुख्यमंती ने दो हफ्ते बाद ही गुजरात माडल को फेल बताया । शिवराज सिंह अलग तरीके की बात करते हैं । तो पहले उन्हें अपनी पार्टी में सर्वसम्मति बनाने दीजिए. वहां एनडीए सिकुड़ रहा है और कांग्रेस के सहयोगी दलों की तादाद बढ़ रही है ।
 सवाल - मोदी को बीजेपी में चुनाव प्रचार की और आपको कांग्रेस में मीडिया की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है तो क्या ये राहुल बनाम मोदी से पहले माकन बनाम मोदी हो रहा है ।
माकन – मोदी से पहले जेटली और महाजन बीजेपी में प्रचार समिति के प्रभारी रहे हैं । इसमें मोदी बनाम माकन का सवाल नहीं हैं । पहले बीजेपी उनके बारे में सोचे . एनडीए में उनके दोस्त दुश्मन तय करेंगें उनके बारे में ,और मोदी तो लोकप्रिय नेता भी नहीं हैं ।
सवाल  - क्या आप मोदी को राष्ट्रीय नेता या लोकप्रिय नेता नहीं मानते हैं ।

माकन – मोदी नेशनल लीडर नहीं है वो तो सिर्फ गुजरात के मुख्यमंत्री हैं , गुजरात के नेता हैं और लोकप्रिय कतई नहीं । अभी आपने कर्नाटक में नही देखा , मोदी वहां चुनाव प्रचार के लिए गए थे । कर्नाटक में युवा वोटर भी है और सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाल शहरी वोटर भी ज़्यादा है ,लेकिन क्या हुआ नतीजा । बीजेपी वहां बुरी तरह से चुनाव हार गई । टि्वटर पर और सोशल मीडिया पर प्रचार से हिंदुस्तान में कोई लोकप्रिय लीडर नहीं बन जाता ।

सवाल - क्या आपको लगता है कि अगला चुनाव राहुल बनाम मोदी होगा या कांग्रेस उससे बचना चाहती है ।
माकन – मोदी को बीजेपी पीएम पद का उम्मीदवार नहीं बनाना चाहती । एनडीए में मोदी स्वीकार्य नहीं हैं , सिर्फ मीडिया मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाना चाहता है । आपने बीजेपी से पूछा है कि उनका पीएम उम्मीदवार कौन है , क्या बीजेपी कह रही है कि मोदी उनके पीएम पद के दावेदार होंगें तो फिर इस पर बहस का क्या मतलब है ।
सवाल - बीजेपी को छोड़िए, आप कांग्रेस की बात बताइए , कि 2014 के चुनाव में आपका पीएम पद का उम्मीदवार कौन होगा ।
माकन – ये सवाल सत्ताधारी पार्टी के लिए नहीं होता क्योंकि सत्ताधारी यानी सरकार में बैठी पार्टी के पास अपना प्रधानमंत्री होता है । ये सवाल विपक्ष से पूछा जाता है कि आप मौजूदा सरकार को हटाना चाहते हैं तो आपका उम्मीदवार कौन होगा । हम तो अपने दस साल के यूपीए सरकार के कामकाज पर वोट मांगेंगें ।

सवाल - क्या राहुल गांधी अगले चुनाव के लिए पीएम पद के दावेंदार होंगें ।
माकन- हमारे मुल्क में प्रेसिडेंशल सिस्सटम आफ गवर्नेंस नहीं हैं कि उसमें एक व्यक्ति को लेकर चुनाव लड़ा जाए और लोकतंत्र में सांसदों का ये अधिकार होता है कि वे अपना नेता तय करें ।

सवाल- इस साल चार अहम राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने हैं , आप कांग्रेस का क्या भविष्य देखते हैं ।
माकन- राजस्थान में पिछले एक साल में गहलोत सरकार का ग्राफ तेज़ी से बढ़ा है । उन्होंने काफी काम वहां किया है और दिल्ली में शीला दीक्षित सरकार काफी लोकप्रिय है । शीला जी के नेतृत्व में लगातार तीन चुनाव जीत कर सरकार ने बहुत काम किया है और हमें उम्मीद है कि दोनों जगह हम फिर से सरकार बनाएंगें । मध्यप्रदेश में करप्शन बड़ा मुद्दा है । कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं , हम करप्शन के मसले को उठाएंगे । छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर काबू नहीं पाया जा सका है ,ये अहम मुद्दा है वहां पर । इसके साथ ही सभी राज्यों से जुड़े उनके मुद्दों को हम ज़ोरशोर से उठाएंगे ।
सवाल - दिल्ली में आपको लोकप्रिये नेता माना जाता है , क्या ये मानूं कि चुनाव के बाद आप दिल्ली में सरकार की ज़िम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं ।
माकन – दिल्ली में पिछले 15 साल से शीला दीक्षित जी के नेतृत्व में सरकार चल रही है । उनके नेतृत्व में हमनें लगातार तीन बार चुनाव जीते हैं । और मुझे भरोसा है कि चौथी बार भी हम दिल्ली में चुनाव जीतेंगें और शीला जी ही मुख्यमंत्री होंगी ।


सवाल - अभी कांग्रेस झारखंड में एक नया राजनीतिक बदलाव कर रही है , आप जेएमएम के साथ मिलकर वहां सरकार बनाने की तैयारी में हैं ।
माकन – हम समान विचारधारा वाली पार्टियों लाइक मांइडेड पीपुल के साथ चलना चाहते हैं । झारखंड और बिहार में ऐसा ही करना चाहते हैं । वहां कांग्रेस लोगों को एक चुनी हुई सरकार देना चाहती है ताकि आम आदमी की सुनवाई हो सके , उसकी परेशानियों का निपटारा जल्द हो सके ।

सवाल- बिहार में हाल में जनता दल यूनाइटेड ने एनडीए से रिश्ता तोड़ लिया है बीजेपी पर साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगा कर , क्या आप उन्हें भविष्य के लिए एक अच्छा सहयोगी के तौर पर देखते हैं ।
माकन- जनता दल यूनाइटेड के साथ गठबंधन पर अभी कुछ कह पाना मुश्किल होगा । ये सच है कि हमनें विश्वास मत के दौरान नीतीश कुमार की सरकार के पक्ष में वोट दिया था ,लेकिन उसकी वज़ह थी कि हम साम्प्रदायिक शक्तियों को रोकना चाहते थे ,लेकिन आगे के लिए अभी कह पाना मुश्किल है . पिछला चुनाव हमनें आरजेडी के साथ मिल कर लड़ा था ।

सवाल - बिहार जैसी मुश्किल आपके लिए पश्चिम बंगाल में भी आ सकती है क्योंकि वहां तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों में से किसी एक को चुनना होगा , किसे चुनेंगें आप ।
माकन- पश्चिम बंगाल में दोनों पार्टियां हमारे साथ रही हैं । 2004 के चुनाव के बाद वाम दल हमारे साथ थे और फिर 2009 में तृणमूल कांग्रेस सरकार में साथ रही ,लेकिन ये भी एक तथ्य है कि दोनों ही पार्टियां आखिर तक हमारे साथ नहीं रही हैं ।कांग्रेस में एंटोनी कमेटी गठबंधन और नए सहयोगियों के बारे में सलाह मशविरा कर रही है ।

सवाल - कुछ लोगों का मानना है कि देश में दो बड़ी पार्टियां होनी चाहिएं क्योंकि छोटी पार्टियां देश के हित को प्राथमिकता नहीं देती ।
माकन- ये फैसला जनता को करना है कि वो देश में कैसी सरकार चाहती है , क्या वो एक गठबंधन को जनादेश देती है या फिर एक बड़ी पार्टी को । वैसे 1989 के बाद से ही देश में गठबंधन की राजनीति का दौर चल रहा है और कांग्रेस गठबंधन धर्म को हमेशा से अच्छे से निभाती आई है ।

सवाल- क्या आपको लगता है कि अगला चुनाव करप्शन बनाम कम्युनलिज़्म होगा यानी क्या बड़ा मद्दा होगा , सांप्रदायिकता या भ्रष्टाचार ।
माकन - करपश्न एक मुद्दा है । पिछले कुछ समय में करप्शन के कुछ मामले सामने आए हैं । जो लोग दोषी पाए गए उनके खिलाफ कांग्रेस ने कार्रवाई भी की है । कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ही काम नहीं किया है ,उसे उजागर करने का हथियार भी कांग्रेस ने ही दिया है जैसे आरटीआई और सीएजी में भी विनोद राय जैसे अधिकारियों की नियुक्ति यूपीए सरकार के ही कार्यकाल में हुई और कांग्रेस ने भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की । इसके साथ ही यूपीए सरकार के दस साल के कामकाज पर हम वोट मांगेंगें ।
सवाल - क्या आप साम्प्रदायिकता को चुनावी मुद्दा नहीं बनाना चाहते ।
माकन – साम्प्रदायिकता को मुद्दा बनाना हमारी इच्छा नहीं हैं . हम अपनी लकीर बड़ी करना चाहते हैं ।
 आखिरी सवाल , क्या आपको भरोसा है कि आप यूपीए 3 के तौर पर फिर लौट रहे हैं ।
माकन- यूपीए 3 की तरफ तो जा ही रहे हैं हम लोग । कदम दर कदम बढ़ रहे हैं और यकीन है कि हम अगली बार फिर सरकार बनाएंगें और यूपीए 3 में जनता की सेवा करेंगें ।
समाप्त , विजय त्रिवेदी 



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