Tuesday, June 25, 2013

marital rape


विजय त्रिवेदी

और ऊंचा करो आसमान को

उपन्यासकार मृदुला गर्ग का एक चर्चित उपन्यास है - उसके हिस्से की धूप । इसमें नायिका कहती है कि शादी क्या है एक बंधन, दोनों को एक साथ खाना, पीना, घूमना , सोना , चाहे इच्छा हो या ना हो ।
. जिस रात वो अपने पति को छोड़ना चाहती है , तलाक लेना चाहती है क्योंकि उसके और पति के दरम्यान ऐसा कुछ नहीं ,जिससे ज़िंदगी को आगे बढ़ाया जा सके । पति के पास वक्त नहीं , फैक्ट्री से थका मांदा लौटा , सीधा कमरे में बिस्तर पर , वो कुछ कहना चाहती है ,लेकिन...

उसे सुनने की इच्छा नहीं ...वो करवट लेकर सोने की कोशिश करती है ,मन बेचैन है , छोड़ना चाहता है..तभी पति का हाथ उस पर ,और फिर....
उसके अनचाहे बीते रात के वो क्षण.....
ये पति की ज़बरदस्ती है या मैराइटल रेप की श्रेणी में आता है या नहीं , मुझे समझ नहीं आता , लेकिन मेरी एक महिला मित्र डाक्टर के मुताबिक उनके पास हर दिन कोई ना कोई ऐसा मामला ज़रुर आता है जिसमें बीवी के साथ मर्द ने ज़बरदस्ती की हो , कभी तरीके को लेकर ,तो कभी इच्छा ।

.....नायिका से उसका प्रियतम पूछता है कि क्या तुमने अपने पति को बता दिया , जवाब – नहीं , क्यों – क्या किया रात भर..। जवाब- एक सप्ताह बाद घर लौटने वाला पति क्या करता है ।
मर्द की नज़र में औरत क्या है - एक प्रोडक्ट., एक ब्यूटी प्रोडक्ट और एक्ट आफ सैक्स ।मामला गंभीर है । यूपी के एक मंत्री हैं राजाराम पांडे , उनकी सुनिए- अपने जिले की कलेक्टर की तारीफ कर रहे हैं -जब पहले वाली कलेक्टर कामिनी चौहान थी- तो मैं सोचता था कि कोई उनकी सुंदरता का मुकाबला नहीं कर सकता ,लेकिन अब जब नई कलेक्टर ( के धनलक्ष्मी ) आई हैं तो मैं मानता हूं कि वो उनसे भी ज़्यादा सुंदर हैं ।
क्या यूपी के नौजवान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव या कोई और मंत्री जी से पूछेगा कि आप होते कौन हैं , कलेक्टर की सुंदरता पर कमेंट करने वाले ।

एक केन्द्रीय मंत्री हैं श्रीप्रकाश जायसवाल – वो भी यूपी से ही हैं , जब टी 20 मैच में भारत ने पाकिस्तान पर जीत हासिल की तो उन्होंने कहा कि वक्त के साथ जीत का मज़ा धुंधला होता जाता है जैसे बीवी के पुराने होने पर उसका आकर्षण कम हो जाता है।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे और कांग्रेस के सांसद अभिजीत मुखर्जी का गैंगरेप के खिलाफ प्रदर्शन कर रही लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ बयाने - डेन्टेड पेन्टेड वीमन तो अभी लोग भूले नहीं हैं । सवाल बयानों का नहीं , मानसिकता का है जो आसानी से बदलने वाली नहीं ।
सरकार में बैठे ज़्यादातर लोग मानते हैं कि औरत की देह पर मर्द का , उसके पति का हक है इसलिए शादीशुदा ज़िंदगी में ज़बरदस्ती को बलात्कार नहीं कहा जा सकता । यानी शादीशुदा होने का मतलब है पत्नी को पति की जायदाद मानना या बुरा ना लगे तो गुलाम मानना ।
यूएन पोपुलेशन फंड आफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया था कि हिंदुस्तान में दो तिहाई औरतों के पति उनकी पिटाई करते हैं या फिर उनके साथ ज़बरन सैक्स होता है ।
इंटरनेशनल मैन एंड जेंडर इक्विलिटी सर्वे के मुताबिक हर पांच में से एक शादीशुदा औरत के साथ पति ज़बरन या अनचाहा सैक्स करते हैं ।

कृष्णा सोबती के उपन्यास दिलो दानिश में महक और कुटुम्ब के बीच वकील कृपानारायण का चरित्र ,औरत -मर्द के रिश्तों की कहानी में बहुत कुछ अनकहे ही जोड़ देता है ।

बात सिर्फ हिंदुस्तान भर की नहीं है , सिमोन द बोआ ने ज़माने पहले लिखा कि दुनिया भर में औरतों की हालत करीब करीब एक जैसी ही है - पीड़ित । शादीशुदा मर्दों के दूसरे रिश्ते या शादी से बाहर के संबंध कोई बहुत अचरज वाली बात नहीं हैं और वो उसे मर्दानगी का सबूत मानते हैं ।

दो दो शादियां करना या रखना भी अनहोनी सा नहीं है । जो लोग ये मानते हों कि इस्लाम में कई शादियों की इजाज़त है और मुसलमान एक से ज़्यादा शादियां करते हैं तो उन्हें इस अध्ययन से हकीकत समझने में मदद मिलेगी जिसके मुताबिक हिंदुस्तान में 5.7 फीसदी मुसलमान, 5.8 फीसदी हिंदू और 15.27 फीसदी आदिवासी एक से ज़्यादा शादियां करते हैं ।
मेराइटल रेप को समझने के लिए आए दिन अखबारों में छपने वाली ताकत की दवाओं के इश्तहार काफी हैं ,जो ये बताते हैं कि औरत के शरीर पर जीत ही असली जीत है ।

हमारे सबसे प्रामाणिक माने जाने वाले कामसूत्र में वात्सायन ने सदियों पहले समझ लिया था कि सैक्स सिर्फ कला या आनंद नहीं , औरत को जीतने की कला है और इसलिए कामसूत्र में सभी आसन, व्यायाम, तरीके औरत की देह जीतने का इंतज़ाम करते दिखाई देते हैं ।

महाभारत में खुले दरबार में भीष्म, युधिषि्ठर और अर्जुन की मौजूदगी में द्रौपदी का चीरहरण , दुशासन और दुर्योधन का अट्टहास सिर्फ औरत पर जीत की कहानी है ।

रामचरित मानस में सीता के अपहरण के लिए जिस लक्ष्मण रेखा के उल्लंघन का हम बार बार ज़िक्र करते हैं और सीता को दोषी करार देते हैं वो सामाजिक मर्यादाओं की रेखा तो रावण ने लांघी थी ,सीता पर नज़र डालकर , उनका अपहरण करके ,लेकिन हमारे लिए आज भी सीता ही गुनहगार है क्योंकि उन्होंने लक्ष्मण रेखा को लांघा था ।

बस डर यही है कि कहीं मुझे महिला लेखकर मानकर कोई ऋषि मुझे शाप ना दे दे और अहिल्या की तरह मुझे शिला बन कर जीना पड़े । टीवी पर कोई विज्ञापन चल रहा है , विजेता महिला खिलाड़ियों को लेकर , देखकर अच्छा लग रहा है , इस विज्ञापन को देखकर एक शेर याद आ रहा है -
देखना है मेरी उड़ान को ,
तो जाओ और ऊंचा करो आसमान को ।।
समाप्त विजय त्रिवेदी 

2 comments:

  1. बहुत शानदार लेख है विजय भाई ..असल में मेरिटल रेप को इस समाज में किसी प्रकार कि मान्यता ही नहीं, हर कोई यह समझता है की शादी की बाद पति जो चाहे अपनी पत्नि के साथ कर सकता है ..समाज की नजरो में ये गुनाह भी नहीं ... यह बाद सामज के अलावा हमारे नेताओं और नीति निर्धारकों को भी समझ नहीं आती इसका उदहारण हाल में गठित की गयी वर्मा कमिटी की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा बनाया गया अध्यादेश है जिसमे उन्होंने मेरिटल रेप को रेप मानने से मना कर दिया ..खैर हमारी लड़ाई जारी रहेगी
    आपका धन्यावाद एक संवेदन शील मुद्दे पर बातचीत करने के लिए

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  2. IT IS REALLY A VERY COMPLEX MATTER---EVEN THEN YOU HAVE BEEN SUCCESSFUL IN HIGHLIGHTING THE CORE ISSUES---HOPE YOU CAN GO DEEPER IN VIEW OF THE CHANGING TIMES.

    CAN I TAKE UP ANOTHER ISSUE ---AT PERSONAL LEVEL--- WHICH IS MORE URGENT AND IMPORTANT.-------- SOME PEOPLE IN NDTV SCRATCH OLD WOUNDS WITH GREAT BIAS SPECIALLY BY BURKHA DUTT. A MAN OF YOUR IMPARTIALITY SHOULD FIND A MORE IMPARTIAL CHANNEL--OF COURSE--IF YOU CAN AFFORD TO DO IT. I HOLD YOU IN GREAT ESTEEM HENCE I THOUGHT I SHOULD EXPRESS MY CONCERN.---

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