Monday, June 24, 2013

females in Iran



विजय त्रिवेदी

ऐ लड़की 

मध्य एशिया का बड़ा देश ईरान, और ईरान का सबसे बड़ा शहर तेहरान ....... खूबसूरत चेहरा , ज़ाफरान घुला गोरा रंग, गहरी काली आंखों में अचानक पानी उतर आया , आवाज़ कंपकपां आई , एक चुप्पी जो लंबी होने लगी थी … वो मुझे देख रही थी

आंखों में सवाल लिए हुए ,सवाल आंखों से ज़ुबान पर उतर आया , आवाज़ में तीखापन – क्या आप इसे औरतों की आज़ादी मानते हैं , अच्छे कपड़े पहनना, कालेज में पढ़ने भेज देना , नौकरी करने की इजाज़त दे देना , आज़ादी नहीं है मेरे लिए।

 ये सिर्फ मर्दों की सहूलियत का दूसरा नाम है , जितना आपको अच्छा लगे , उतना लड़की को करने देना आज़ादी नहीं हो सकती । आज़ादी का मायने है अपनी ज़िंदगी के फैसले करने देने की आज़ादी , फिर वो चाहे छोटे फैसले हों या बड़े ।

लगा ,ये सवाल सिर्फ अकेली ताहिरा का नहीं हैं और ना ही वो नवयुवती सिर्फ मुझसे जवाब चाहती है ,
जवाब तो उसे अपने मुल्क से चाहिए । अपने मुल्क की मर्दों की ताकत और सोच समझ वाली सोसायटी से चाहिए ।

 उम्र 25 के करीब , पढ़ी लिखी , अंग्रेज़ी में ग्रेजुएशन कर चुकी , नौकरी कर रही है , शादी की उम्र , शादी करना चाहती है , अपनी पंसद की शादी । ऐसा नहीं है कि वहां लव मैरिज नहीं होती , 50 फीसदी से ज़्यादा होती है ,लेकिन सिर्फ दिखावा सा है ।

ईरान में औरतों की आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं । मौन, औरतों के हक के नाम पर पसरा सन्नाटा । ईरान को आर्यों की ज़मीन माना जाता है , लैंड आफ आर्यन । 6 फुट से ज़्यादा लंबे , कद्दावर, मज़बूत गोरे चिकने नौजवान लड़कों का ठहाका हर कहीं गूंजता सुनाई देता है , लेकिन लड़कियों की ज़ुबान पर ताला लगा दिया गया है , मानो उनके हक की बात भी कोई नहीं कर सकता ।

कोई महिला संगठन नहीं हैं , कोई राजनीतिक संगठन नहीं है जो औरतों के हकों की बात करे , किसी ने थोड़ी हिम्मत की तो उसे जेल में डाल दिया गया ताकि आगे से कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत भी नहीं दिखाए,लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि लड़कियों को खाना पीना नहीं मिल रहा, ना ही हिंदोस्तान की तरह बेटियों को पैदा होते ही मारने की घटनाओं का ज़िक्र है । 

मगर वो रोजाना घुट घुट कर जी रही है । जीना तो हम कहते हैं उसे , दरअसल मर रही है , कसक है , घुटन है , दिल की धड़कन में भी वो तकलीफ सुनाई दे रही है ।

चाय ठंडी होने लगी थी ,ताहिरा रुकना नहीं चाहती , ज़िंदगी के सफर पर , अचानक एक मोड़ .. चौंकने की बारी अब मेरी थी … वो लड़का हिंदुस्तानी है , गुजराती , जैन परिवार से , साफ्टवेयर इंजीनियर कुणाल, कनाडा में बसा हुआ, घर परिवार अहमदाबाद में ।

 मुलाकात इंटरनेट पर हुई और दो साल बाद मुलाकात हुई , रोजा़ना फोन पर बात होती , हिंदुस्तान में ही उससे मुलाकात का फैसला किया , पापा को ज़िद की , कि वो मेरे साथ चलें, गए भी , मुलाकात भी हुई, उसके परिवार वालों से भी , बेहद अच्छे लोग हैं वो, किसी तरह की कोई बंदिश नहीं , उन्हें कोई आपत्ति भी नहीं ,लेकिन मेरे पापा और घर वाले तैयार नहीं ,

दोस्त , रिश्तेदार हर कोई समझाना चाहता है , दबाव डालना चाहता है , बोला ,तुम्हारी हर बात मानते हैं , मैंने कहा कि मेरी ज़िंदगी के लिए सबसे ज़रुरी बात नहीं मानेंगे तो सब बेमायने ।
कॅाफी टेबल पर सामने नाज़ली थी, खूबसूरत, पढ़ी लिखी, नवयुवती, कान्फीडेंस से भरी ,ढेर सारे सवाल लिए। 

ईरान में लड़कियों के लिए शादी ही नहीं है अहम फैसला । शादी तो मानो कोई मायने ही नहीं । लड़का जब चाहे तलाक ले लेता है , लड़कों के लिए तीन चार शादियां आम बात है , तलाक की दर बहुत ज़्यादा है , मेरे घर और दोस्तों की बात करुं तो बहुत कम होंगे जिनमें तलाक नहीं हुआ और मर्दों ने दूसरी तीसरी शादियां नहीं की हो ।

पहनना ओढ़ना भी मर्दों के हिसाब से ही होगा । सिर ढंक कर रहना होगा । वैसे सोसायटी के दो चेहरे हैं सार्वजनिक तौर पर अलग, निजी तौर पर अलग । पार्टियों में लड़कियां जा सकती हैं ,, घरों के भीतर मर्जी आए जैसे रह सकती हैं ,लेकिन बाहर पूरे शरीर को ढंक कर रहना होगा । 

कई बार पुलिस शादी पार्टियों में भी आ जाती है , लड़कियों को पकड़ कर ले जाती है । बसें रुकवा कर भी जांच होती है , सिर से हिजब नहीं हटना चाहिए, बांहें खुली ना हो । अपनी शादी की पार्टी में पूरी रात डर लगता रहा कि कहीं पुलिस आकर सारी पार्टी खराब ना कर दे ।

तेहरान की यूनिवर्सिटी में पढ़ने वालों में 60 फीसदी से ज़्यादा लड़कियां हैं , यूनिवर्सिटी के एंट्रेस एक्ज़ाम में लड़के पास ही नहीं हो पाते , लेकिन हाल ही में सरकार ने 36 विश्वविद्यालयों में 77 कोर्स लड़कियों के लिए बंद कर दिए हैं , इनमें कंप्यूटर सांइस, सिविल इंजीनियरिंग, केमेस्ट्री, इंग्लिश ट्रांसलेशन जैसे कौर्सेज शामिल हैं 

तेहरान का खूबसूरत म्यूजि़म है गुलिस्तान म्यूजियम , शीशों के बेहद खूबसूरत काम वाला महल, शाह और उससे पहले इसी महल का सरकारी समारोंहों के लिए इस्तेमाल होता था । इस म्यूजियम में भारत, रुस, चीन आदि बहुत से मुल्कों से दिए गए उपहार रखे हुए हैं वहां गाइड का काम करही है शीला ,

शीला की एक और दोस्त है , हिस्ट्री की स्टूडेंट रही हैं , एक एक बारीकी समझाती हैं मुस्कराते हुए, मैं औरतों के हालात पर बात करना चाहता हूं अलग से, तभी दो नौजवान लड़के आ जाते हैं उनसे सवाल जवाब करने के लिए , बिल्कुल धमकाते हुए अंदाज़ में , लड़कियां चुप हो जाती हैं ।

उस खूबसूरत नवयुवती के चेहरे पर नाक पर पट्टी चिपकी हुई है ,पता चला कि नाक की सर्जरी करवाई है , ईरान में सुंदरता के लिए होने वाली सर्जरी में सबसे ज़्यादा नाक की सर्जरी के मामले हैं क्योंकि ईरान में लड़कियों को सिर्फ चेहरा खुला रखने की इजाज़त है , इसलिए ज़्यादातर लड़कियां अपनी नाक को पतली तीखी करने के लिए सर्जरी करवाती हैं ।


ईरान की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता शिरीन इबादी ईरान से बाहर रह कर औरतों की आज़ादी की लड़ाई लड़ रही है । यूनिवर्सिटी में लड़कियों के लिए कोर्सेज बंद करने पर इबादी ने लिखा कि ये साबित करता है कि ईरान की मर्द सोसायटी लड़कियों को सिर्फ घर और परिवार तक सीमित रखना चाहती है ताकि वो सोसायटी और मुल्क में कोई अहम भूमिका नहीं निभा सके ,

मैं इसका विरोध करती हूं । ईरान में कोई राजनेता औरत नहीं है । तीन साल पहले एक युवती नेहा आगा सुल्तान सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान मारी गई थी , उसके बाद से किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई ।

समाप्त
विजय त्रिवेदी








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