Friday, June 28, 2013

poem- झाडू जाग जाती है


                   एक खूबसूरत कविता याद आ रही है -

झाडू बहुत सुबह जाग जाती है 
और शुरु कर देती है अपना काम,
बुहारते हुए अपनी अटपटी भाषा में ,
वो लगातार बड़बड़ाती है ,
                    कचरा बुहारने की चीज़ है,घबराने की नहीं 
                    कि अब भी बनाई जा सकती है ,
                    जगह, रहने के लायक।।

Thursday, June 27, 2013

हां, मैं क्रेजी हूं ,arunima sinha


    हांमैं  क्रेजी  हूं …..

नकली पैर और असली जज़्बे के साथ एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला अरुणिमा सिन्हा

एक मित्र ने जयपुर से फोन करके कहा कि ज़िंदगी में सिर्फ क्रेजी लोग ही कुछ सकते हैं ,जिन्हें हम लोग आमतौर पर मज़ाक उड़ाने के अंदाज़ में मेंटल कहते है,वरना आम लोग तो सिर्फ जीते हैं और मरते हैं ,और मुलाकात हो गई एक ऐसे ही मेंटल से , क्रेजी से ,जिसे लोग वाकई कह रहे थे कि पागल हो गई हो क्या,

मुझे भी लगा कि उनके फैसले करने की हिम्मत और जज़्बा तो बिना पागलपन के हर्गिज़ हो ही नहीं सकता ,जब तक कि ऐसी जिद ना हो कि चाहिए ही चाहिए ।बमुश्किल ऐसे पागल लोगों से मुलाकात हो पाती है ।एक नकली पैर के साथ माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली अरुणिमा सिन्हा ।

सवाल-अरुणिमा तुम तो इतना ऊपर चढ़ गई हो कि कहां से शुरु करें बात , एक पैर के साथ पूरा पहाड़ चढ़ गई और वो भी माउंट एवरेस्ट,पागल हो गई हो क्या ।

Tuesday, June 25, 2013

marital rape


विजय त्रिवेदी

और ऊंचा करो आसमान को

उपन्यासकार मृदुला गर्ग का एक चर्चित उपन्यास है - उसके हिस्से की धूप । इसमें नायिका कहती है कि शादी क्या है एक बंधन, दोनों को एक साथ खाना, पीना, घूमना , सोना , चाहे इच्छा हो या ना हो ।
. जिस रात वो अपने पति को छोड़ना चाहती है , तलाक लेना चाहती है क्योंकि उसके और पति के दरम्यान ऐसा कुछ नहीं ,जिससे ज़िंदगी को आगे बढ़ाया जा सके । पति के पास वक्त नहीं , फैक्ट्री से थका मांदा लौटा , सीधा कमरे में बिस्तर पर , वो कुछ कहना चाहती है ,लेकिन...

उसे सुनने की इच्छा नहीं ...वो करवट लेकर सोने की कोशिश करती है ,मन बेचैन है , छोड़ना चाहता है..तभी पति का हाथ उस पर ,और फिर....

Monday, June 24, 2013

females in Iran



विजय त्रिवेदी

ऐ लड़की 

मध्य एशिया का बड़ा देश ईरान, और ईरान का सबसे बड़ा शहर तेहरान ....... खूबसूरत चेहरा , ज़ाफरान घुला गोरा रंग, गहरी काली आंखों में अचानक पानी उतर आया , आवाज़ कंपकपां आई , एक चुप्पी जो लंबी होने लगी थी … वो मुझे देख रही थी

आंखों में सवाल लिए हुए ,सवाल आंखों से ज़ुबान पर उतर आया , आवाज़ में तीखापन – क्या आप इसे औरतों की आज़ादी मानते हैं , अच्छे कपड़े पहनना, कालेज में पढ़ने भेज देना , नौकरी करने की इजाज़त दे देना , आज़ादी नहीं है मेरे लिए।

 ये सिर्फ मर्दों की सहूलियत का दूसरा नाम है , जितना आपको अच्छा लगे , उतना लड़की को करने देना आज़ादी नहीं हो सकती । आज़ादी का मायने है अपनी ज़िंदगी के फैसले करने देने की आज़ादी , फिर वो चाहे छोटे फैसले हों या बड़े ।

लगा ,ये सवाल सिर्फ अकेली ताहिरा का नहीं हैं और ना ही वो नवयुवती सिर्फ मुझसे जवाब चाहती है ,

Friday, June 21, 2013

इच्छाओं से बनता है तरक्की की रास्ता


विजय त्रिवेदी

योजना आयोग के सदस्य बी के चतुर्वेदी से खास मुलाकात

इच्छाओं से बनता है तरक्की की रास्ता

उनके दिमाग में खाका खिंचा हुआ है पूरे हिंदुस्तान का , उसके आगे बढ़ने की रफ्तार का, पिछड़े हुए राज्यों का, बढ़ते हुए उद्योगों का , घटती शिशु मृत्यु दर का , हिसाब किताब है आम आदमी की हर साल बढ़ती आमदनी का ,गांवों से जो़डती सड़कें, रोशन होते घर, स्कूलों की तादाद और अस्पतालों में होते इलाज । दफ्तर का कमरा भले ही एयरकंडीशन्ड हो,लेकिन जैसलमेर की तपती गर्मी और लेह लद्दाख पड़ती बर्फ दोनों का अंदाज़ा उन्हें हैं ,मगर फिर क्यों ऐसा है कि

Tuesday, June 18, 2013

बिहार ने फिर रोका बीजेपी का रथ

विजय त्रिवेदी

एनडीए के सेक्यूलर चेहरे पर सवाल,
दोस्त मिलने में आएगी मुश्किल

23साल बाद एक बार फिर बिहार ने बीजेपी के साम्प्रदायिकता के रथ को आगे बढ़ने से रोक दिया,लेकिन इस बार जब जनता दल यूनाइटेड के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी को रोकने का फैसला किया तब बीजेपी के महारथी नरेन्द्र मोदी रथ पर सिर्फ चढ़ने की तैयारी कर रहे थे ।

इससे पहले 23 अक्टूबर 1990 को लालू यादव ने आडवाणी के राम जन्मभूमि आंदोलन का रथ तब रोका था जब वे कई राज्यों की यात्रा करके समस्तीपुर पहुंचे थे ।

उसका नतीजा ये रहा कि आडवाणी का रथ भले ही रुक गया ,लेकिन उसकी आंधी नहीं

Sunday, June 16, 2013

स्वागत

सरोकार में आपका स्वागत है.

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