Tuesday, August 15, 2017

PM ने किया TRIPLE TALAQ के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली महिलाओं का अभिनंदन

70वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Triple  Talaq के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली महिलाओं का अभिनंदन किया. प्रधामंत्री ने कहा, भविष्य के निर्माण में माताओं-बहनों का योगदान अहम होता है. मैं उन बहनों का अभिनंदन करना चाहता हूं कि जो तीन तलाक से...

Wednesday, August 9, 2017

जरा सोचिए, क्या औरत सचमुच एक शरीर भर है आपके लिए ?


स्त्री लेखको को जो लानतें- मलानतें पिछले दिनों भेजी गईं , उसका निरपेक्ष विश्लेषण कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है. साथी पुरुषों से अनुरोध है कि जरा रुक कर सोचें –
क्या आपको सचमुच यह लगता है कि स्त्रियां सिर्फ शरीर हैं? उनमें सिर्फ पाशविक संवेदनाएं हैं और निरपेक्ष निर्णय का विवेक उन्हें छू तक नहीं

सैंडिल मार्च की जगह CANDLE MARCH क्यों निकालते हैं?

एक चमन बहार नेता उठकर आता है और मायावती जैसी सशक्त औरत को भी वेश्या कहकर चला जाता है. दिल्ली पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित बयान देकर जाती हैं कि उन्हें भी असुरक्षा महसूस होती है दिल्ली की सड़कों पर. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की कीमत गुरमेहर कौर बलात्कार की धमकियां सुनकर

Monday, August 7, 2017

#‎meriraatmeriraah‬’ क्या आप भी निकलेंगी शनिवार की रात में सड़कों पर?

वर्णिका की क्या ग़लती थी. यही कि वह रात में सड़क पर निकली. क्या इसलिए किसी को भी यह खुली छूट मिल गई कि कोई उसका पीछा करे या उसके अपहरण की कोशिश करे. क्या किसी लड़की के रात में अकेले निकलने पर किसी की मर्द को उस औरत का अपहरण कर लेने, उसका रेप करने और उसे मार कर फेंक देने की छूट मिल जाती है? पुरुषों की इसी मानसिकता को चुनौती देने के लिए महिलाओं ने एक दिन रात में सड़क पर निकलने का फैसला किया है. Social Media पर ‪#‎meriraatmeriraah’ का Campaign चलाया जा रहा है जिसके तहत महिलाएं रात में दिल्ली में सड़कों पर निकलेंगी. सोशल मीडिया पर चल रहे इस कैंपेन को महिलाओं का खूब समर्थन मिल रहा है.  
इस कैंपेन पर रीवा सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है- बस अभी घर में कदम रखा है 11:40 बजे. ये कोई वक़्त है? हां, क्योंकि दिन ढल जाने के बाद भी वक़्त ज़िंदा रहता है. मैं रातों को जी भरकर जीती हूं, खुद में भर लेना चाहती हूं. अब भी अक्सर ही रात में 11-12 बजे एमजी रोड मेट्रो स्टेशन से घर (डीएलएफ़ फेज़ 2) तक पैदल ही आती हूं. सड़क पर कोई नहीं दिखता सिवाय वॉचमैन के तब मुझे मैं दिखायी देती हूं.
वर्णिका से जो सवाल किये जा रहे हैं वो धरती की हर दूसरी लड़की से पूछ-पूछकर घिस दिए गए हैं. रात के सवा बारह बजे बाहर क्यों? ये सवाल अपने कुलदीपक राज-दुलारों से नहीं पूछा जाता. हमसे पूछा जाता है- तो जवाब है-
# ताकि ये सड़कें रात में भी सड़कें ही बनी रहें.
# ताकि हमारे दिन में भी कुल 24 घण्टे हों.
# क्योंकि सड़कों का टैक्स हम भी देते हैं.
# क्योंकि दिन ढलने के बाद इन सड़कों पर खतरे का साइनबोर्ड नहीं लगाया जाता. 

तो अब हम निकलेंगे रातों को, एक दिन नहीं अक्सर ही, ताकि इन्हें आदत पड़ जाये हमें देखने की. हम निकलेंगे सड़कों पर बिना किसी काम के क्योंकि लड़कियों के निकलने से पहले ही ये सवाल दागा जाता है कि- ऐसा कौन-सा ज़रूरी काम था. दिन तय कर लेते हैं, मेरे मुताबिक 12 अगस्त ठीक रहेगा, शनिवार है. रात का वक़्त है तो सभी फ्री रहेंगे. सभी लड़कियां दिल्ली के अलग-अलग कोनों से अपने मोहल्लों में निकलें. मुझे लगता है पहली बार सभी एक ही जगह आएं, फिर अपने हिसाब से घूमते रहेंगे. जगह इंडिया गेट या जंतर-मंतर या कोई भी पार्क हो सकता है. बिना तैयार हुए घर के कपड़ों में सहज रूप में निकलें. साथ में स्नैक्स, पानी की बोतल और मच्छरों से बचने के लिए ओडोमोस वगैरह रख सकते हैं. रातभर गपशप करें, गाएं, बजाएं, मस्ती करें. ऐसा ही दूसरे क्षेत्रों में रह रही लड़कियां भी कर सकती हैं. चलिये, निकलते हैं.
वहीं गीता यथार्थ यादव लिखती हैं- आओ सड़क पर चले, 
हर घटना के बाद पूछा जाता हैं—  रात को बाहर क्या कर रही थी. !!?? चलो सहेलियों, रात बताओ. 
किस रात दिल्ली की सड़कों पर उतरा जाये. करेंगे क्या? कुछ नहीं, घर से पानी का बोतल लाना, चिप्स भी. रात भर सड़कों पर इधर से उधर घूमेंगे.

क्या आप तो बड़े होटल्स में जूठा और बासी खाना तो नहीं खाते ?


अगली बार कहीं बाहर जाएं तो सोचिएगा. कुछ दिन पहले एक परिचित दावत के लिये उदयपुर के एक मशहूर रेस्टोरेंट में ले गए. मैं अक़्सर बाहर खाना खाने से कतराता हूं किन्तु सामाजिक दबाव तले जाना पड़ा. आजकल पनीर खाना रईसी की निशानी है इसलिए उन्होंने कुछ डिश पनीर की ऑर्डर की. प्लेट में रखे पनीर के अनियमित टुकड़े मुझे कुछ अजीब से लगे.

Thursday, August 3, 2017

"बेबी बॉटल " ख़त्म करने के लिए भारत क्या नार्वे के रास्ते पर चल सकता है ?

नार्वे में में बच्चे के दूध के लिए ‘बेबी बॉटल ’ ढूंढना दुर्लभ कह सकते हैं. डिजाइनदार तो छोड़ ही दें. वहां बोतल से दूध पीते बच्चे बस-ट्रेन कहीं नहीं मिलते. हर सार्वजनिक स्थलों और ऑफिसों में स्तनपान के कमरे हैं.
मेरी एक कर्मचारी जब लगभग एक साल की छुट्टी के बाद लौटीं, ‘रोस्टर’ बना. मैने देखा कि एक घंटे के दो ‘पॉज़’ हैं. मुझे समझ नहीं आया, फिर देखा ‘अम्मो’ लिखा है, मतलब स्तनपान का

Tuesday, July 25, 2017

क्या सुप्रीम कोर्ट भी चंडीगढ़ की इस बच्ची को एबार्शन की इजाज़त नहीं देगा ?

दस साल की एक बच्ची से उसका एक रिश्तेदार लगातार सात महीनों तक ‘गंदा खेल’ खेलता रहा. अब वो बच्ची अपने पेट में 26 हफ्ते का गर्भ लेकर अदालत पहुंची है. उसकी मांग है कि उसे गर्भपात की इजाजत

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